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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी, सेंसेक्स और निफ्टी में भारी कमी

भारतीय शेयर बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और मौद्रिक नीति के सख्त होने की आशंका के चलते सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट आई है। बीएसई सेंसेक्स 1,045 अंक गिरकर ढाई साल के निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी भी 371.25 अंक की कमी के साथ बंद हुआ। इस गिरावट के पीछे विदेशी निवेशकों की बिकवाली और ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना है। जानें इस स्थिति का बाजार पर क्या असर पड़ा है और आगे की संभावनाएँ क्या हैं।
 

शेयर बाजार में गिरावट का कारण

मुंबई, 8 अक्टूबर: कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और मौद्रिक नीति के सख्त होने की आशंका के चलते घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट आई। बीएसई सेंसेक्स 1,045 अंक गिरकर 71,593.24 अंक पर बंद हुआ, जो ढाई साल का सबसे निचला स्तर है। एनएसई निफ्टी भी 371.25 अंक की कमी के साथ 22,231.80 अंक पर पहुंच गया।


कारोबार के दौरान, सेंसेक्स एक समय 1,310.95 अंक तक लुढ़क गया था। यह स्तर 13 फरवरी, 2024 के आसपास का है। निफ्टी ने 423.15 अंक की गिरावट के साथ 22,179.90 अंक के 52 सप्ताह के निचले स्तर को छुआ।


बीएसई सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में आईटीसी के शेयर में सबसे अधिक 4.24 प्रतिशत की गिरावट आई। अन्य कंपनियों जैसे इंटरग्लोब एविएशन, पावर ग्रिड, और अदाणी पोर्ट्स ने भी नुकसान उठाया।


बाजार की स्थिति और विदेशी निवेश

वहीं, टेक महिंद्रा, एक्सिस बैंक और इन्फोसिस के शेयरों में बढ़त देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमत 4.25 प्रतिशत बढ़कर 104.5 डॉलर प्रति बैरल हो गई। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को 6,121.37 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।


भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी प्रमुख नीतिगत दर को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है। यह चार साल में पहली बार है जब दरों में वृद्धि की गई है। केंद्रीय बैंक ने महंगाई, कमजोर रुपये और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच आगे भी दरों में वृद्धि की संभावना को खारिज नहीं किया।


आर्थिक चुनौतियाँ

रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने आम सहमति से रेपो दर बढ़ाने का निर्णय लिया। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि घरेलू बाजार में बिकवाली का दौर जारी है।


उन्होंने बताया कि ब्याज दरों में वृद्धि, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, और रुपये में गिरावट ने बाजार पर दबाव डाला है। बीएसई स्मॉलकैप और मिडकैप सूचकांक भी क्रमशः 2.58 प्रतिशत और 2.53 प्रतिशत गिर गए।


बीएसई में 3,426 शेयर नुकसान में रहे, जबकि 1,003 शेयर लाभ में रहे। बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें भी एक प्रमुख चिंता बनी हुई हैं।


वैश्विक बाजारों का प्रभाव

एशिया के अन्य बाजारों में भी गिरावट देखने को मिली, जिसमें दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, और चीन का एसएसई कम्पोजिट शामिल हैं। यूरोप के प्रमुख बाजारों में भी गिरावट का रुख रहा।


अमेरिकी बाजार भी बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे। सेंसेक्स बुधवार को 429.11 अंक गिरकर 72,638.70 अंक पर बंद हुआ था।