भारतीय शेयर बाजार में गिरावट: ट्रंप के बयान से निवेशकों में हड़कंप
भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक अनिश्चितता का प्रभाव
वैश्विक अस्थिरता और युद्ध की संभावनाओं ने भारतीय शेयर बाजार को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। गुरुवार को, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद, जिसमें उन्होंने ईरान पर अगले दो से तीन हफ्तों में "कठोर" हमले की चेतावनी दी, निवेशकों में बेचैनी फैल गई। इस चिंता के कारण सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट आई।
ट्रंप का बयान और बाजार की प्रतिक्रिया
ट्रंप ने कहा, "हम ईरान पर बहुत ज़ोरदार हमला करने जा रहे हैं। अगले दो से तीन हफ्तों में, हम उन्हें पाषाण युग में वापस भेज देंगे।" उन्होंने यह भी बताया कि ईरान का तेल ढांचा एक संभावित लक्ष्य है, और आवश्यकता पड़ने पर अमेरिका उनके तेल ठिकानों पर हमला कर सकता है।
सुबह 9:27 बजे तक, S&P BSE सेंसेक्स 1,401.01 अंक गिरकर 71,733.32 पर पहुँच गया, जबकि NSE Nifty50 439.55 अंक की गिरावट के साथ 22,239.85 पर आ गया।
विश्लेषकों की राय
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा कि ट्रंप के बयान ने बाजार का माहौल नकारात्मक बना दिया है।
उन्होंने बताया कि ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 5% की वृद्धि हुई, जो $105 पर पहुँच गई, और अमेरिका के 10-वर्षीय बॉंड की यील्ड भी बढ़कर 4.36% हो गई। इसका सोने और चांदी की कीमतों पर मामूली नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
शेयर बाजार में गिरावट
बाजार खुलने के बाद, HCL Technologies Ltd एकमात्र ऐसा शेयर था जो हरे निशान में रहा, जिसमें 0.08% की वृद्धि हुई।
वहीं, Sun Pharmaceutical Industries Ltd के शेयरों में सबसे बड़ी गिरावट आई, जो 4.52% नीचे आ गए। Indigo Ltd में 3.93% की गिरावट आई, जबकि Adani Ports और NTPC Ltd में भी गिरावट देखी गई।
इस बीच, FPIs ने भारी बिकवाली जारी रखी, और 1 अप्रैल को उन्होंने 8331 करोड़ रुपये की बिकवाली की।
रुपये पर दबाव
डॉ. विजयकुमार ने चेतावनी दी कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और बढ़ता व्यापार घाटा भारतीय रुपये के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं।
विदेश से आने वाले पैसे में कमी और FPI की लगातार निकासी ने रुपये पर भारी दबाव डाला है, जिसे RBI की डॉलर पाबंदियां भी संभाल नहीं पा रही हैं।
भविष्य की संभावनाएँ
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के बयानों में निरंतर बदलाव होता रहता है, इसलिए "दो से तीन हफ्तों में काम पूरा करने" के दावे को पूरी तरह सच नहीं माना जा सकता।
हालांकि, ऑटो सेक्टर के मार्च के मजबूत आंकड़ों ने इस क्षेत्र के शेयरों को थोड़ी मजबूती दी है, जो बाजार को गिरने से बचाने में मदद कर सकते हैं।