भारतीय शेयर बाजार में जोरदार उछाल, निवेशकों को मिला बड़ा लाभ
शेयर बाजार का प्रदर्शन
मुंबई - भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को सकारात्मक रुख के साथ कारोबार समाप्त किया। दिन के अंत में, सेंसेक्स 905.01 अंक या 1.24 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 74,151.04 पर और निफ्टी 237.90 अंक या 1.05 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,936.75 पर बंद हुआ।
बाजार में व्यापक खरीदारी का माहौल देखा गया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 566.95 अंक या 0.99 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 57,841.65 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 176.45 अंक या 0.95 प्रतिशत की मजबूती के साथ 18,811.35 पर बंद हुआ।
सूचकांकों में निफ्टी रियल्टी (2.75 प्रतिशत), निफ्टी एफएमसीजी (2.34 प्रतिशत), निफ्टी पीएसयू बैंक (2.20 प्रतिशत), निफ्टी सर्विसेज (1.61 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (1.24 प्रतिशत), निफ्टी इन्फ्रा (1.18 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.18 प्रतिशत), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (1.17 प्रतिशत), और निफ्टी पीएसई (1.15 प्रतिशत) ने सबसे अधिक बढ़त दर्ज की।
हालांकि, मुख्य सूचकांकों में केवल निफ्टी ऑटो (0.24 प्रतिशत) में गिरावट आई। सेंसेक्स में अदाणी पोर्ट्स, कोटक महिंद्रा बैंक, पावर ग्रिड, इटरनल, बजाज फाइनेंस, एचयूएल, एसबीआई, टाइटन, एनटीपीसी, बीईएल, इन्फोसिस, आईटीसी, भारती एयरटेल, एमएंडएम, एलएंडटी, टीसीएस, आईसीआईसीआई बैंक, एचसीएल टेक और बजाज फिनसर्व ने लाभ कमाया। वहीं, ट्रेंट, मारुति सुजुकी, टेक महिंद्रा और एचडीएफसी बैंक में गिरावट आई।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि को रोकने, कच्चे तेल की कीमतों में हल्की कमी और संस्थागत निवेशकों की सक्रियता के कारण भारतीय शेयर बाजार में तेजी आई है, जबकि बाहरी परिस्थितियाँ चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। मजबूत उपभोक्ता मांग के चलते एफएमसीजी शेयरों में सबसे अधिक तेजी देखी गई। इसके अलावा, फाइनेंशियल, आईटी, रियल्टी और पावर सेक्टर में भी मजबूती आई। मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी तेजी बनी रही, जो बाजार के व्यापक सुधार का संकेत है।
विशेषज्ञों ने आगे बताया कि हाल ही में विदेशी निवेशकों की खरीदारी और घरेलू संस्थागत निवेशकों के समर्थन से बाजार में तरलता की स्थिति में सुधार हुआ है। कंपनियों की आय में स्थिरता और घरेलू मांग में मजबूती बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं, हालांकि इनपुट लागत में वृद्धि से कंपनियों के लाभ पर दबाव पड़ सकता है। दूसरी ओर, ब्रेंट क्रूड की ऊंची कीमतें, रुपये की कमजोरी, घरेलू बॉंड यील्ड में वृद्धि और भू-राजनीतिक अनिश्चितता अभी भी प्रमुख जोखिम बने हुए हैं।