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भारतीय शेयर बाजार में तेजी: निवेशकों का विश्वास बढ़ा

भारतीय शेयर बाजार में हाल ही में तेजी आई है, जिसका मुख्य कारण वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत हैं। सेंसेक्स और निफ्टी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों का बढ़ता विश्वास भी इस रुख को समर्थन दे रहा है। जानें बाजार में तेजी के पीछे की प्रमुख वजहें और कंपनियों के शानदार तिमाही नतीजों का प्रभाव।
 

बाजार में सकारात्मक रुख


मुंबई: वैश्विक बाजारों से मिले अच्छे संकेतों के कारण निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है। दोपहर लगभग 12 बजे तक, सेंसेक्स में 651 अंकों की वृद्धि हुई, जिससे यह 78,745.72 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी भी 218 अंकों की बढ़त के साथ 24,601.55 पर कारोबार कर रहा था। 'निफ्टी फार्मा' को छोड़कर, अन्य सभी सेक्टरों में तेजी देखी गई। इसके अलावा, मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी हुई।


बाजार में तेजी के प्रमुख कारण

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट: ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 5% घटकर 83.56 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। चूंकि भारत अपनी अधिकांश तेल जरूरतें आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में कमी से महंगाई पर नियंत्रण पाया जा सकता है, जिससे बाजार को राहत मिलती है।


विदेशी निवेशकों का विश्वास: जुलाई में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया। भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था, स्थिर रुपये और बड़े शेयरों की उचित कीमतों के कारण विदेशी निवेशक लगातार निवेश कर रहे हैं।


वैश्विक तनाव में कमी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के संकेत मिलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में युद्ध का खतरा कम हुआ, जिससे क्रूड ऑयल की कीमतें भी घटीं।


दुनिया भर के बाजारों से सकारात्मक संकेत: एशियाई बाजारों में तेजी रही और शुक्रवार को अमेरिकी बाजार भी बढ़त के साथ बंद हुए। वैश्विक स्तर पर बने इस सकारात्मक माहौल का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा।


रुपये की मजबूती: विदेशी फंड्स के आगमन, गिरते तेल के दामों और आरबीआई के सहयोग से भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 31 पैसे मजबूत हुआ।


कंपनियों के शानदार तिमाही परिणाम: ITC, डिविस लैबोरेटरीज, अर्बन कंपनी, बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व जैसी प्रमुख कंपनियों ने जून तिमाही के बेहतरीन नतीजे पेश किए, जिससे इनके शेयरों में तेजी आई। इसके अलावा, क्रेडिट ग्रोथ, ऑटो बिक्री और प्रॉपर्टी की बढ़ती मांग ने भी बाजार को मजबूती प्रदान की।