भारतीय शेयर बाजार में तेजी: सेंसेक्स और निफ्टी में बढ़त
भारतीय शेयर बाजार में तेजी
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली। वैश्विक संकेतों की कमजोरी के बावजूद, सेंसेक्स और निफ्टी ने सकारात्मक बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। कच्चे तेल की कीमतों में कमी, रुपये की मजबूती, और आईटी, बैंकिंग तथा उपभोक्ता कंपनियों के शेयरों में खरीदारी ने बाजार को मजबूती प्रदान की। निवेशकों की बढ़ती रुचि के चलते दोनों प्रमुख सूचकांकों में अच्छी वृद्धि हुई।
सेंसेक्स और निफ्टी का प्रदर्शन
बीएसई सेंसेक्स कारोबार के अंत में 1,534 अंक यानी 2.11% की वृद्धि के साथ 74,315.61 पर बंद हुआ। इसी तरह, एनएसई निफ्टी 375 अंक यानी 1.66% चढ़कर 22,997.35 पर पहुंच गया। इस तेजी के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं, जिनमें कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और रुपये की मजबूती शामिल हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 1 डॉलर से अधिक गिर गईं। निवेशक होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमलों के कारण तेल की आपूर्ति में संभावित बाधा पर नजर रखे हुए हैं, जबकि अमेरिका द्वारा तेल की ढुलाई के खर्च को कम करने के प्रयासों का भी असर देखने को मिला है। अमेरिका ने कुछ जहाजों पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने का निर्णय लिया है।
तेल की कीमतों का प्रभाव
ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 1.76 डॉलर यानी 1.75% घटकर 104 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चे तेल की कीमत 1.02 डॉलर यानी 1.07% घटकर 94.07 डॉलर प्रति बैरल रह गई। तेल की कीमतों में कमी से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश को राहत मिलने की उम्मीद है, जिससे महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर चिंता कम हो सकती है।
आईटी कंपनियों में तेजी
इस बीच, सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में तेजी बनी रही। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टेक महिंद्रा के शेयरों में बढ़त देखी गई। कंपनियों के बेहतर परिणामों और एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली के कारण निवेशकों का रुख भारतीय आईटी शेयरों की ओर बढ़ा।
वैश्विक बाजारों का प्रभाव
हालांकि, वैश्विक बाजारों से संकेत कमजोर रहे। अमेरिका में सितंबर की महंगाई उम्मीद से अधिक रहने के बाद एशियाई बाजारों में गिरावट आई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी लगभग 7% गिर गया, जबकि जापान का निक्केई 225 भी 1.3% नीचे रहा। अमेरिका के शेयर बाजार में भी बुधवार को गिरावट देखी गई, जहां एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयर दबाव में रहे।
निवेशकों का विश्वास
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार, एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में सुधार भारतीय बाजार के लिए फायदेमंद हो सकता है। उनका मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयर बेचकर इन कंपनियों में निवेश कर सकते हैं। आगामी बजट में दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर की समीक्षा के संकेत भी बाजार को सहारा दे सकते हैं।
रुपये की मजबूती
रुपये की मजबूती ने भी निवेशकों का विश्वास बढ़ाया। गुरुवार को रुपये की शुरुआती कारोबार में 0.2% की वृद्धि हुई, जिससे यह डॉलर के मुकाबले 94.92 पर पहुंच गया। पिछले सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए थे। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों का प्रभाव सीमित समय तक रह सकता है और वैश्विक दबाव बना रह सकता है।
बाजार की स्थिति
कुल मिलाकर, तेल की कीमतों में गिरावट, रुपये की मजबूती और कुछ क्षेत्रों में खरीदारी से बाजार को राहत मिली है। फिर भी, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, वैश्विक महंगाई और कच्चे तेल की आगे की चाल पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।