भारतीय शेयर बाजार में तेजी: सेंसेक्स में 800 अंकों की वृद्धि
शेयर बाजार में जोरदार वापसी
भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को एक मजबूत वापसी का प्रदर्शन किया। सेंसेक्स में 800 से अधिक अंकों की वृद्धि हुई, जबकि निफ्टी 22,500 के स्तर के करीब पहुंच गया। गुरुवार की भारी गिरावट के बाद, निवेशकों ने निचले स्तरों पर बिकवाली का शिकार हुए शेयरों में खरीदारी की, जिससे बाजार में तेजी आई। यह ध्यान देने योग्य है कि अमेरिकी सरकार द्वारा प्रमुख टेक कंपनियों पर ग्रीन-कार्ड नियमों को लेकर लगाई गई पाबंदियों के बावजूद आईटी शेयरों में शानदार तेजी देखने को मिली। बाजार में यह रिकवरी काफी चौंकाने वाली रही, क्योंकि गुरुवार की तेज बिकवाली के बाद निवेशकों को आईटी सेक्टर पर और दबाव बढ़ने की आशंका थी।
IT शेयरों ने रिकवरी की अगुवाई की
सबसे बड़ी बढ़त आईटी शेयरों से मिली, जो अमेरिकी ग्रीन-कार्ड प्रतिबंधों और टेक्नोलॉजी पर खर्च के आउटलुक को लेकर चिंताओं के बीच दबाव में थे। शुरुआती कारोबार में निफ्टी आईटी इंडेक्स 3.02% बढ़कर 28,574.85 पर पहुंच गया और मार्केट की हालिया स्थिति में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला सेक्टर इंडेक्स बन गया। TCS के शेयरों में 4.98% की तेजी आई, जबकि Infosys में 3.07%, Wipro में 3.23% और Tech Mahindra में 2.13% की बढ़त हुई।
गिरावट के बाद 'बार्गेन बाइंग'
शुक्रवार को आई तेजी के पीछे एक और महत्वपूर्ण कारण 'बार्गेन बाइंग' है। गुरुवार को सेंसेक्स 1,045.46 अंक या 1.44% गिरकर 71,593.24 पर बंद हुआ। इस भारी गिरावट के कारण कई शेयर बिकवाली से पहले के मुकाबले सस्ते हो गए, जिससे उन निवेशकों के लिए मौके बने जो ऐसी कंपनियों के शेयर खरीदना चाहते हैं जिनमें उन्हें लंबे समय में ग्रोथ की संभावना दिखती है।
TCS के Q2 नतीजों से एक और बढ़ावा मिला
गुरुवार को घोषित TCS के सितंबर तिमाही के नतीजों ने भी IT शेयरों के प्रति सकारात्मक माहौल बनाने में मदद की है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के लिए 13,884 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफ़िट दर्ज किया, जो एक साल पहले के 12,075 करोड़ रुपये से लगभग 15% अधिक है।
कच्चे तेल से थोड़ी राहत, लेकिन जोखिम अब भी बरकरार
शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई, जिससे हालिया उछाल के बाद बाजारों को कुछ राहत मिली। ब्रेंट क्रूड 1.31% गिरकर 102.91 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। हालांकि, ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बने रहना भारत के आयात बिल, महंगाई और कॉरपोरेट लागत को लेकर चिंताओं को बनाए रखे हुए है।