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भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, RBI की दर वृद्धि का असर

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को RBI की मौद्रिक नीति समिति के निर्णय के बाद भारी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 400 अंक से अधिक गिर गया, जबकि निफ्टी 22,650 के नीचे चला गया। निवेशकों में RBI की रेपो रेट वृद्धि और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता बनी हुई है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार को प्रभावित किया है। जानें इस स्थिति का विस्तृत विश्लेषण और इसके संभावित प्रभाव।
 

भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव


बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के निर्णय से पहले निवेशकों में सतर्कता बनी रही, जिसके कारण सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट आई। बाजार खुलने के कुछ समय बाद सेंसेक्स में 400 अंक से अधिक की गिरावट आई, जबकि निफ्टी 22,650 के नीचे चला गया। इस गिरावट का मुख्य कारण RBI की बैठक से जुड़ी अनिश्चितता थी। निवेशक रेपो रेट और मौद्रिक नीति के संकेतों का इंतजार कर रहे थे। इसके अलावा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर रुपये ने भी बाजार के माहौल को प्रभावित किया।


सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत

बुधवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 102.43 अंक यानी 0.14 फीसदी गिरकर 72,965 पर खुला। वहीं, निफ्टी 50 में 85.65 अंक यानी 0.38 फीसदी की गिरावट आई और यह 22,690 के स्तर पर खुला। बैंक निफ्टी भी दबाव में रहा, जो करीब 170 अंक यानी 0.31 फीसदी गिरकर 54,958.15 के स्तर पर खुला। बाजार खुलने के बाद बिकवाली तेज हो गई, जिससे सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में लगभग 468 अंक तक गिर गया, जबकि निफ्टी 50 ने 22,600 का इंट्राडे स्तर छुआ।


RBI के निर्णय का प्रभाव

RBI ने बुधवार को रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि करते हुए इसे 5.25 फीसदी से बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया। यह फरवरी 2023 के बाद पहली बार है जब रेपो रेट में वृद्धि की गई है। RBI ने अपनी नीति का रुख 'न्यूट्रल' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' कर दिया है। रेपो रेट में वृद्धि से ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों पर दबाव की आशंका बनी हुई है, विशेषकर ऑटो, रियल एस्टेट और कुछ वित्तीय कंपनियों के शेयरों में। हालांकि, बाजार की शुरुआती प्रतिक्रिया के बाद बैंकिंग शेयरों में कुछ सुधार भी देखने को मिला।


कच्चे तेल की कीमतों का असर

शेयर बाजार के लिए एक और चिंता का विषय कच्चे तेल की कीमतें हैं। बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 1 फीसदी बढ़कर 101.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई। पश्चिम एशिया में तनाव और तेल आपूर्ति में अनिश्चितता ने कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। महंगा कच्चा तेल भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए चिंता का विषय है, जिससे आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर भी दबाव बन सकता है।


विदेशी निवेशकों की बिकवाली

भारतीय बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली भी चिंता का कारण बनी हुई है। विदेशी निवेशकों ने 6 अक्टूबर को लगभग ₹2,961 करोड़ के भारतीय शेयर बेचे, और यह लगातार आठवां कारोबारी सत्र है जब FIIs बिकवाल रहे। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशक बाजार को कुछ सहारा दे रहे हैं। मंगलवार को घरेलू संस्थानों ने लगभग ₹5,088 करोड़ की खरीदारी की थी। शेयर बाजार की गिरावट के बीच भारतीय रुपया भी दबाव में रहा, और शुरुआती कारोबार में यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 10 पैसे कमजोर होकर 96.45 प्रति डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा।