×

भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों का असर

भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को भारी गिरावट का सामना किया, जिसका मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में गिरावट आई, जबकि अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक बाजारों की कमजोरी ने भी स्थिति को और बिगाड़ दिया। जानें इस गिरावट के पीछे के प्रमुख कारण और इसके संभावित प्रभाव।
 

मुंबई में शेयर बाजार की स्थिति


मुंबई: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ने भारतीय शेयर बाजार को मंगलवार को भारी गिरावट की ओर धकेल दिया। इसके अलावा, वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत और विदेशी निवेशकों की निरंतर बिकवाली ने भी बाजार की स्थिति को प्रभावित किया। कारोबार के अंत में, सेंसेक्स 561.46 अंक गिरकर 77,054.94 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 158.95 अंक की कमी आई, जो इसे 24,052.05 के स्तर पर ले आया।


बाजार में व्यापक गिरावट देखी गई, और अधिकांश सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। केवल एफएमसीजी, फार्मा और मेटल शेयरों में थोड़ी बढ़त देखने को मिली। छोटे और मझोले शेयरों पर भी दबाव बना रहा; निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.85% और निफ्टी मिडकैप 100 में 0.60% की गिरावट आई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण ईंधन और मैन्युफैक्चरिंग लागत में वृद्धि की आशंका के चलते ऑटो सेक्टर में 1.6% और बैंकिंग व वित्तीय शेयरों में 1.2% की गिरावट आई। इसके साथ ही, कमजोर मांग और धीमी ग्रोथ की चिंताओं के चलते एचसीएल टेक का शेयर भी 2.2% नीचे आया।


शेयर बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण

1. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव


अमेरिका ने ईरान पर फिर से सैन्य हमले किए हैं। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20% शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है।


2. कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि


ब्रेंट क्रूड का मूल्य 1.63% बढ़कर 84.60 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जो 17 जून को अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद का उच्चतम स्तर है। चूंकि भारत अपनी अधिकांश कच्चे तेल की जरूरतें आयात करता है, इसलिए तेल की महंगाई भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के विशेषज्ञ वीके विजयकुमार के अनुसार, यदि तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहीं, तो इसका भारतीय बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।


3. वैश्विक बाजारों की कमजोरी


एशियाई बाजारों में आज भारी गिरावट देखी गई। दक्षिण कोरिया का कॉस्पी 3.71% तक गिर गया, जबकि जापान का निक्केई, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग भी नुकसान में रहे। अमेरिकी बाजारों में सोमवार को गिरावट के साथ बंद होने से निवेशकों में घबराहट बढ़ गई।


4. विदेशी निवेशकों की बिकवाली


विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को भारतीय बाजार से 3,062.27 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर पैसा निकाल लिया। इस निरंतर बिकवाली ने घरेलू निवेशकों का विश्वास कमजोर कर दिया है।


5. बाजार में बढ़ती घबराहट


बाजार में उतार-चढ़ाव को मापने वाला इंडेक्स 'इंडिया विक्स' लगभग 3% बढ़कर 14 के स्तर के पास पहुंच गया है। यह संकेत करता है कि आने वाले दिनों में बाजार में और भी बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।


6. वीकली F&O एक्सपायरी का दबाव


मंगलवार को फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स की साप्ताहिक एक्सपायरी भी थी। एक्सपायरी के दिन आमतौर पर निवेशक अपनी पुरानी पोजीशन को बंद या रोलओवर करते हैं, जिससे बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।


7. कमजोर होता रुपया


भू-राजनीतिक तनाव और अन्य एशियाई मुद्राओं में गिरावट के कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 48 पैसे कमजोर होकर 96.16 के स्तर पर आ गया। रुपये की कमजोरी ने भी बाजार पर दोहरा दबाव डाला है।