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भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: जानें कारण और प्रभाव

सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई, जिसमें सेंसेक्स 1000 अंक से अधिक गिर गया। इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं, जैसे बढ़ती बॉंड यील्ड, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, और वैश्विक तनाव। RBI द्वारा लिक्विडिटी से जुड़े कदमों ने भी बाजार पर दबाव डाला है। जानें इन सभी कारकों का बाजार पर क्या प्रभाव पड़ा है और निवेशकों को क्या देखना चाहिए।
 

शेयर बाजार में बिकवाली का दौर


सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार की रिकवरी के बाद फिर से भारी बिकवाली का सामना करना पड़ा। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन, सेंसेक्स अपने इंट्रा-डे उच्च स्तर से 1000 अंक से अधिक गिर गया। दोपहर 1 बजे के बाद, सेंसेक्स 71,850 अंक के नीचे कारोबार कर रहा था। निफ्टी में भी 300 अंक से अधिक की गिरावट देखी गई। इस कमजोरी के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण बताए जा रहे हैं।


बॉन्ड यील्ड का प्रभाव

शेयर बाजार पर सबसे बड़ा दबाव सरकारी बॉंड की बढ़ती यील्ड से उत्पन्न हो रहा है। अमेरिका और भारत दोनों में बॉंड यील्ड में वृद्धि से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। अमेरिकी 10 साल के ट्रेजरी बॉंड की यील्ड 5.3 प्रतिशत के पार पहुंचने के बाद, सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर निवेशकों का झुकाव बढ़ा है।


भारत में बॉंड यील्ड का स्तर

भारत में 10 साल के सरकारी बॉंड की यील्ड 7.37 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो लगभग तीन साल का उच्चतम स्तर है। यह वृद्धि RBI द्वारा बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त लिक्विडिटी कम करने के उपायों की घोषणा के बाद हुई है।


RBI का CRR पर निर्णय

RBI ने बैंकों के कैश रिजर्व रेशियो (CRR) में भी बदलाव किया है। 16 अक्टूबर से शुरू होने वाले पखवाड़े से, बैंकों को अपनी CRR आवश्यकता का कम से कम 99 प्रतिशत दैनिक बैलेंस बनाए रखना होगा, जबकि पहले यह सीमा 90 प्रतिशत थी। इस बदलाव को बाजार में बैंकिंग सिस्टम की लिक्विडिटी पर प्रभाव डालने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है।


विदेशी निवेशकों की बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की निरंतर बिकवाली भी दबाव बढ़ा रही है। अक्टूबर में अब तक केवल छह कारोबारी सत्रों में, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने लगभग 45,125 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे हैं। यह आंकड़ा सितंबर में हुई लगभग 45,536 करोड़ रुपये की कुल बिकवाली के बराबर है।


वैश्विक तनाव का असर

बाजार की चिंता केवल घरेलू आर्थिक संकेतकों तक सीमित नहीं है। ईरान ने युद्ध समाप्त करने के अमेरिकी प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है, जिससे वैश्विक तनाव बढ़ा है। यमन के हूथी विद्रोहियों ने रियाद के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हमले की जिम्मेदारी ली है, जिसमें 13 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं।


प्रॉफिट बुकिंग का प्रभाव

सोमवार की गिरावट का एक कारण प्रॉफिट बुकिंग भी है। सेंसेक्स और निफ्टी पिछले सप्ताह बढ़त के साथ बंद हुए थे, और लगातार आठ सप्ताह की गिरावट का सिलसिला भी टूटा था। ऐसे में कुछ निवेशकों ने हाल की तेजी के बाद मुनाफा वसूलना शुरू किया।


निवेशकों की नजरें

कुल मिलाकर, बढ़ती बॉंड यील्ड, विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली, RBI के लिक्विडिटी से जुड़े कदम, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और प्रॉफिट बुकिंग ने सोमवार को दलाल स्ट्रीट पर दबाव बढ़ा दिया। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर विदेशी फंडों के रुख, बॉंड यील्ड और वैश्विक घटनाक्रम पर रहेगी।