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भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट

मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई, जिसमें सेंसेक्स 1000 अंक से अधिक लुढ़का और निफ्टी भी गिरावट का सामना कर रहा है। आईटी और ऑटो सेक्टर में बिकवाली ने निवेशकों को प्रभावित किया। ट्रंप की टैरिफ नीति और अमेरिका-ईरान तनाव ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभाव।
 

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट


मुंबई: मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में एक बड़ी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 1000 से अधिक अंक गिरकर 82,277 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 288 अंक लुढ़ककर 25,450 से नीचे चला गया। आईटी और ऑटो सेक्टर में भारी बिकवाली ने निवेशकों को सबसे अधिक प्रभावित किया।


कुल मिलाकर, बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण लगभग 4.96 लाख करोड़ रुपये घटकर 464 लाख करोड़ रुपये रह गया। ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति, अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक बाजारों की कमजोरी ने निवेशकों में चिंता पैदा की है।


ट्रंप की टैरिफ नीति से अनिश्चितता

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को रद्द कर दिया था, लेकिन अब प्रशासन सेक्शन 232 के तहत नए टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन करने वाले देशों पर अधिक ड्यूटी लगाई जा सकती है। ट्रंप का पहला स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन आज होने वाला है, जिससे वैश्विक बाजार सतर्क हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उनके ट्रेड पॉलिसी पर दिए गए संदेश से बाजार की दिशा तय होगी।


अमेरिका-ईरान तनाव में वृद्धि

ईरान में विरोध प्रदर्शन और सरकारी कार्रवाई के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की संभावना जताई है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच परमाणु वार्ता 26 फरवरी को प्रस्तावित है। भू-राजनीतिक जोखिमों में वृद्धि के कारण निवेशक सतर्क हो गए हैं। मध्य पूर्व में अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतें भी प्रभावित हो रही हैं, जिसका असर रुपये और बाजार पर पड़ रहा है।


आईटी शेयरों में बिकवाली

आईटी सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 2.84 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसका कारण यह है कि वैश्विक एआई टूल्स से पुराने सॉफ्टवेयर के अपग्रेड की लागत कम होने की संभावना है। एन्थ्रोपिक के क्लॉड कोड टूल्स के दावों ने आईटी कंपनियों के भविष्य के ऑर्डर पर सवाल उठाए हैं, जिससे निवेशकों ने बड़े पैमाने पर बिकवाली की और यह सेक्टर सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला बन गया।


रुपये की कमजोरी और वैश्विक संकेत

रुपया डॉलर के मुकाबले 7 पैसे गिरकर 90.96 पर पहुंच गया है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और मजबूत डॉलर इसके पीछे के कारण हैं। एशियाई बाजार सुस्त रहे, जबकि वॉल स्ट्रीट रात भर गिरावट के साथ बंद हुआ। एफआईआई की खरीदारी से रुपये को और अधिक नुकसान नहीं हुआ। कुल मिलाकर, वैश्विक और घरेलू कारकों ने बाजार पर दबाव बनाए रखा है।