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भारतीय शेयर बाजार में मजबूती का संकेत, निवेशकों का भरोसा बढ़ा

इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार ने सकारात्मक रुख के साथ कारोबार समाप्त किया, जिसमें सेंसेक्स और निफ्टी में वृद्धि देखी गई। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और निवेशकों का बढ़ता विश्वास बाजार के लिए राहत का संकेत है। हालांकि, धातु क्षेत्र में कमजोरी बनी रही। जानें इस सप्ताह के प्रमुख घटनाक्रम और आगामी चुनौतियों के बारे में।
 

भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन

छुट्टियों के बावजूद, भारतीय शेयर बाजार ने सकारात्मक रुख के साथ कारोबार समाप्त किया है। इस सप्ताह निवेशकों का विश्वास बढ़ा, जिसका प्रभाव प्रमुख सूचकांकों पर स्पष्ट रूप से देखा गया। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव में कमी ने बाजार में एक सकारात्मक माहौल तैयार किया। इस कारण से, निवेशकों ने कुछ क्षेत्रों में खरीदारी की, जिससे प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए।


सेंसेक्स और निफ्टी का प्रदर्शन

सप्ताह के दौरान, सेंसेक्स में 297.57 अंकों यानी 0.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, और यह 77,100 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 सूचकांक ने 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर को पार करते हुए 24,056 पर पहुंच गया। हालांकि, व्यापक बाजार में उतनी मजबूती नहीं देखी गई। निफ्टी मिडकैप 150 में लगभग 0.9 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 250 लगभग स्थिर रहा।


क्षेत्रवार प्रदर्शन

इस सप्ताह सभी क्षेत्रों में समान तेजी नहीं देखी गई। दवा, पर्यटन और निजी बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों में अच्छी खरीदारी हुई। दवा क्षेत्र का सूचकांक लगभग 2.8 प्रतिशत, पर्यटन क्षेत्र 2.7 प्रतिशत और निजी बैंक सूचकांक लगभग 1 प्रतिशत मजबूत हुआ। दूसरी ओर, धातु, सूचना प्रौद्योगिकी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के शेयरों पर दबाव बना रहा।


धातु क्षेत्र में कमजोरी

धातु क्षेत्र में सबसे अधिक कमजोरी देखी गई। निफ्टी मेटल सूचकांक लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ और सप्ताह भर में लगभग 5 प्रतिशत टूट गया। हालांकि, वर्ष 2026 की शुरुआत से जून तक यह सूचकांक 20 प्रतिशत से अधिक चढ़ चुका था। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत अमेरिकी डॉलर और ब्याज दरों की सख्त नीति के कारण धातु कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ा है।


कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे सप्ताह गिरावट आई है। ब्रेंट कच्चा तेल लगभग 73.6 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई लगभग 71.4 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गया है। कच्चे तेल की कीमतों में कमी से महंगाई की चिंता कुछ कम हुई है, जो तेल आयात करने वाले देशों, विशेषकर भारत के लिए राहत की बात है।


विदेशी और घरेलू निवेशकों की गतिविधियाँ

जून महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग 45,000 करोड़ रुपये की निकासी की है। यह लगातार चौथा महीना है जब विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की है। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग 76,000 करोड़ रुपये का निवेश कर बाजार को सहारा दिया।


आगामी सप्ताह की चुनौतियाँ

नए कारोबारी सप्ताह में निवेशकों की नजर कई महत्वपूर्ण घटनाओं पर रहेगी। अमेरिका के रोजगार संबंधी आंकड़े, भारत के विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के सूचकांक, जून महीने के वाहन बिक्री आंकड़े और कच्चे तेल की कीमतों की चाल बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी 50 के लिए 24,200 का स्तर प्रमुख बाधा बना हुआ है। यदि यह स्तर पार होता है, तो बाजार में नई तेजी देखने को मिल सकती है।