भारतीय शेयर बाजार में मजबूती, रिलायंस इंडस्ट्रीज का योगदान
भारतीय शेयर बाजार ने वैश्विक दबावों के बावजूद मजबूती दिखाई है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांकों में बढ़त देखने को मिली, जबकि एशियाई बाजारों में गिरावट का सामना करना पड़ा। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ा है। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और निवेशकों का रुख क्या है।
Jun 10, 2026, 23:04 IST
भारतीय शेयर बाजार की मजबूती
वैश्विक बाजारों में दबाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद, भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। प्रमुख शेयर सूचकांकों ने शुरुआती कारोबार में बढ़त दिखाई, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
शुरुआती कारोबार में सूचकांकों की स्थिति
जानकारी के अनुसार, कारोबार शुरू होते ही संवेदनशील सूचकांक 436 अंकों तक चढ़ गया, जबकि राष्ट्रीय सूचकांक 23,350 के स्तर तक पहुंच गया। सुबह लगभग 9:27 बजे, संवेदनशील सूचकांक 358 अंकों की बढ़त के साथ 74,272 पर कारोबार कर रहा था, और राष्ट्रीय सूचकांक 89 अंकों की तेजी के साथ 23,330 के आसपास बना हुआ था।
एशियाई बाजारों की गिरावट के बीच भारतीय बाजार की मजबूती
यह ध्यान देने योग्य है कि भारतीय बाजार की यह मजबूती उस समय आई है जब अधिकांश एशियाई बाजार गिरावट का सामना कर रहे थे। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से सैन्य कार्रवाई के कारण पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच वार्ताओं के बावजूद शांति समझौते की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी है।
ऊर्जा बाजार पर तनाव का प्रभाव
इस तनाव का असर ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है। बुधवार को कच्चे तेल की कीमतें 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं। एक दिन पहले, अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चा तेल लगभग 89 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गया था, लेकिन बाद में इसमें तेजी आई और कीमतें 93 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय हैं।
भारतीय निवेशकों का सकारात्मक रुख
हालांकि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, भारतीय निवेशकों का रुख सकारात्मक बना रहा। राष्ट्रीय शेयर विनिमय के प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांकों में से अधिकांश बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। उपभोक्ता उत्पाद क्षेत्र से जुड़ा सूचकांक सबसे अधिक मजबूत रहा, जिसमें लगभग 1.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा, बैंकिंग, निजी बैंक, वित्तीय सेवाएं, तेल एवं गैस, और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं से जुड़े क्षेत्र भी मजबूत बने रहे।
बिकवाली का दबाव
दूसरी ओर, मेटल, वाहन, औषधि और कुछ सरकारी बैंकिंग कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी अपेक्षाकृत कमजोरी रही। मध्यम आकार की कंपनियों का सूचकांक हल्की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि छोटी कंपनियों का सूचकांक भी लाल निशान में रहा।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की चर्चा
बाजार में सबसे बड़ी चर्चा रिलायंस इंडस्ट्रीज की रही। कंपनी के शेयरों में लगभग 2.5 प्रतिशत की तेजी आई और भाव 1,300 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। इसका कारण मेटा और रिलायंस के बीच घोषित नई साझेदारी है।
मेटा और रिलायंस की साझेदारी
मेटा, जिसे मार्क जुकरबर्ग ने स्थापित किया था, भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विशाल डाटा केंद्र स्थापित करने के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ मिलकर काम करेगी। जानकारी के अनुसार, गुजरात के जामनगर में 168 मेगावाट क्षमता वाला डाटा केंद्र बनाया जाएगा। यह परियोजना रिलायंस द्वारा निर्मित की जाएगी और मेटा इसका उपयोग करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अन्य कंपनियों में खरीदारी
रिलायंस के अलावा, नेस्ले इंडिया, हिंदुस्तान यूनिलीवर, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, कोटक महिंद्रा बैंक, एशियन पेंट्स, ट्रेंट, बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक और अपोलो हॉस्पिटल्स के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली है। वहीं, हिंडाल्को, अदाणी एंटरप्राइजेज, कोल इंडिया, टाटा स्टील, अदाणी पोर्ट्स, टाटा मोटर्स और श्रीराम फाइनेंस के शेयर दबाव में रहे हैं।
बाजार का समग्र रुख
मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, बाजार का समग्र रुख सकारात्मक रहा। राष्ट्रीय शेयर विनिमय पर 1,474 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई, जबकि 1,276 शेयरों में गिरावट आई। यह स्पष्ट है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू निवेशकों का भरोसा फिलहाल भारतीय बाजार में बना हुआ है।