भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर
भारतीय शेयर बाजार की गिरावट का कारण
हाल के महीनों में भारतीय शेयर बाजार एक अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, जहां हर परिस्थिति में गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। 8 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों द्वारा ₹37,929 करोड़ का नेट आउटफ़्लो दर्ज किया गया, जो कि 29 मई को हुई ₹21,106 करोड़ की नेट सेलिंग के बाद का दूसरा सबसे बड़ा आउटफ़्लो है। इस स्थिति ने निवेशकों के विश्वास को डगमगाने का संकेत दिया है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के पीछे कई कारण हैं, जैसे कि शेयरों का महंगा मूल्यांकन और वैश्विक अनिश्चितता। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों में FIIs ने भारतीय बाजार से लगभग 40 अरब डॉलर निकाल लिए हैं। कई लार्ज-कैप कंपनियों की ग्रोथ मौजूदा वैल्युएशन को सही ठहराने में असमर्थ है, जबकि स्मॉल-कैप और मिड-कैप कंपनियों में बेहतर ग्रोथ की संभावनाएं हैं।
सेंसेक्स और निफ्टी में उतार-चढ़ाव
8 अक्टूबर को भारतीय इक्विटी मार्केट में भारी गिरावट आई, जिसमें BSE सेंसेक्स 1,045.46 अंक गिरकर 71,593.24 पर बंद हुआ। NSE निफ्टी 50 में भी 371.25 अंक की गिरावट आई। हालांकि, 9 अक्टूबर को सेंसेक्स में 879 अंक की तेजी आई, जिससे लगातार गिरावट का सिलसिला थम गया।
RBI की नीतियों का प्रभाव
भारतीय रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया है, जिससे उधारी की लागत बढ़ने की आशंका है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिका में बढ़ते बॉंड यील्ड भी भारतीय इक्विटी पर दबाव डाल रहे हैं।
विदेशी निवेशकों का भारत से मोहभंग
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की जटिल कर प्रणाली और उच्च टैक्स दरें विदेशी निवेशकों के लिए बाधा बन रही हैं। इसके अलावा, गिरता रुपया भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। जब तक रुपये में स्थिरता नहीं आती, तब तक विदेशी निवेशक बड़े निवेश से बचते रहेंगे।