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मखाना: मिथिला की पहचान और वैश्विक सुपरफूड का उदय

मखाना, जो मिथिला की पहचान है, अब एक वैश्विक सुपरफूड बन चुका है। इसकी मांग में तेजी से वृद्धि हो रही है, और भारत इसका सबसे बड़ा उत्पादक है। जानें मखाने की खेती, उत्पादन प्रक्रिया, और इसके स्वास्थ्य लाभ के बारे में। यह लेख मखाने के विकास, निर्यात और बाजार में इसकी स्थिति पर प्रकाश डालता है।
 

मिथिला की पहचान

'पग-पग पोखर, माछ-मखान, सरस बोल, मुस्की मुख कान, ई थिक मिथिलाक पहचान'


जो लोग मिथिला को जानते हैं, उन्होंने कभी न कभी ये पंक्तियाँ सुनी होंगी। इसका अर्थ है कि यदि आपके चारों ओर तालाब, मछलियाँ, मीठी बोली और मुस्कान है, तो आप मिथिला में हैं। यही इस क्षेत्र की पहचान है। व्रत, स्नैक्स या मटर-पनीर की स्वादिष्ट सब्जी, मखाना हमारी थालियों में इस तरह समाहित हो गया है कि यह लगता है जैसे यह सदियों से हमारे घरों का हिस्सा है। पहले घाटे और कठिन परिश्रम वाला मखाना, अब 12 हजार करोड़ रुपये का वैश्विक कारोबार भारत को दे रहा है। मखाना मिथिला की पहचान का एक महत्वपूर्ण तत्व है।


मखाना क्या है और इसकी तैयारी कैसे होती है?

मखाना को अंग्रेजी में फॉक्स नेट कहा जाता है। वैज्ञानिक इसे 'यूरियाले फोरोक्स' के नाम से जानते हैं। यह एक जलीय फसल है, जो उथले तालाबों, झीलों और नम भूमि में उगती है। इसका बीज ही खाने योग्य होता है, जिसे भुनकर और छिलका निकालकर बेचा जाता है। मखाना मुख्य रूप से बिहार, पश्चिम बंगाल और असम में उगाया जाता है।


मखाने की मांग में वृद्धि

जब से मखाना सुपरफूड के रूप में प्रचारित हुआ है, इसकी मांग में तेजी आई है। 2015 से मखाने का व्यापार भारत में तेजी से बढ़ा है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय मखाना बोर्ड का गठन 14 अक्टूबर 2025 को किया गया था। यह अब बिहार के पारंपरिक भोजन से देशभर का 'हेल्थ फूड' बन गया है। बेहतर उत्पादन के लिए कई स्टार्टअप और किसान उत्पादन संगठन (FPO) सक्रिय हो गए हैं।


मखाना बोर्ड का गठन

केंद्र सरकार ने बजट 2025-26 में राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की स्थापना की घोषणा की थी। इसे 15 सितंबर 2025 को बिहार में औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया। मखाना विकास के लिए 2025-26 से 2030-31 तक कुल 476.03 करोड़ रुपये की केंद्रीय योजना मंजूर की गई है। इस योजना में रिसर्च, अच्छे बीज, किसानों के कौशल, कटाई-पोस्ट हार्वेस्ट सुधार, मूल्यवर्धन, ब्रांडिंग, निर्यात और गुणवत्ता नियंत्रण पर ध्यान दिया गया है। 2025-26 के लिए 30 करोड़ और 2026-27 के लिए 90 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं.


भारत का मखाना उत्पादन

साल 2024-25 में भारत का कुल मखाना उत्पादन 63,910 मीट्रिक टन था। प्रति हेक्टेयर लगभग 2.03 मीट्रिक टन की पैदावार रही। 2025-26 के लिए अनुमान है कि उत्पादन 80,590 मीट्रिक टन तक पहुँच सकता है। बिहार अकेले 60,000 मीट्रिक टन मखाना पैदा करता है, जिसमें प्रति हेक्टेयर उपज 2.00 मीट्रिक टन है.


मखाना की खेती के प्रमुख जिले

मखाने की खेती मुख्य रूप से उत्तरी बिहार में होती है। कोसी बेसिन के सुपौल, सहरसा, और मधेपुरा जिलों में मखाना उगाया जाता है। मिथिला-सीमांचल क्षेत्र मखाना की खेती का केंद्र है। उन्नत किस्मों और फील्ड-सिस्टम खेती ने उत्पादकता में वृद्धि की है.


मखाना का निर्यात

भारत हर साल 0.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक मखाना पैदा करता है, जिसमें से लगभग 40 प्रतिशत निर्यात होता है। 2021-22 से 2024-25 के बीच घरेलू बाजार में सालाना 17-18 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. भारत में पैदा होने वाले कुल मखाने का 40 प्रतिशत हिस्सा निर्यात किया जाता है.


मखाने की घरेलू खपत

घरेलू स्तर पर हर महीने 3,000 से 3,500 मीट्रिक टन भुने मखाने की मांग होती है, जिसमें ब्रांडेड कंपनियों का हिस्सा 1,800 से 2,000 मीट्रिक टन और खुले बाजार का 1,200 से 1,400 मीट्रिक टन है. त्योहारों के समय यह मांग 5,000 मीट्रिक टन तक पहुँच जाती है.


मखाने की कीमतों में वृद्धि

उत्पादन में 4 से 5 प्रतिशत की वृद्धि के कारण मखाने की कीमत 2020-22 में 500 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 2025 में 1,250 रुपये प्रति किलो हो गई. मखाना बाजार 2029-30 तक 11,000 करोड़ रुपये से 12,000 करोड़ रुपये तक पहुँचने का अनुमान है.


मखाना का ब्रांडिंग

2025 में डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने पॉप्ड मखाना और अन्य उत्पादों के लिए अलग HSN कोड जारी किया। इससे व्यापार को ट्रैक करना आसान हुआ है. हर महीने ब्रांडेड FMCG कंपनियाँ 1,800 से 2,000 मीट्रिक टन मखाना बाजार में लाती हैं.


भारतीय मखाना की अंतरराष्ट्रीय कीमतें

वाणिज्य मंत्रालय के निर्यात आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका को औसतन 19.5 डॉलर प्रति किलो, कनाडा को 15.8 डॉलर प्रति किलो और यूएई को 13.3 डॉलर प्रति किलो की दर से मखाना बेचा गया. जर्मनी में एक किलो मखाने की कीमत 26 डॉलर, नेपाल में 21.6 डॉलर और ऑस्ट्रेलिया में 21 डॉलर तक पहुँच रही है.


मखाने के स्वास्थ्य लाभ

डॉ. रुपाली जैन, डायटीशियन, BAMS, MS:-
मखाना पोषण के लिहाज से बेहद खास है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, उच्च गुणवत्ता का प्रोटीन, फाइबर, मैग्नीशियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस और आयरन जैसे तत्व होते हैं। इसमें सोडियम कम और कोलेस्ट्रॉल बिल्कुल नहीं होता। यह डायबिटीज के मरीजों के लिए भी एक अच्छा विकल्प है.


मखाना उत्पादन की प्रक्रिया

मखाना उत्पादन की प्रक्रिया तालाब तैयार करने से शुरू होती है। इसके बाद बीज बोना, फसल की देखभाल और अंत में पानी से कटाई की जाती है. प्रोसेसिंग में सुखाना, साफ करना, भूनना, पॉपिंग, पॉलिशिंग और ग्रेडिंग शामिल हैं.


सरकार का समर्थन

नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर मखाना ने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 2012 से 2023 के बीच, संस्थान ने 15,824.1 किलो उच्च उपज वाले बीज किसानों को प्रदान किए और 3,000 से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिया. इससे किसानों की आय बढ़ने और गांवों में रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है.