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मध्य पूर्व में तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट कच्चा तेल 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई की कीमत 102.66 डॉलर रही। सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद यह उछाल आया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति तेजी से बदल रही है, और होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही जारी है। जानें इस संकट का भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
 

कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर से तेजी आई है। सोमवार को ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, हालांकि बाद में यह थोड़ी कम होकर 107.22 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। वहीं, अमेरिकी डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत 102.66 डॉलर प्रति बैरल रही।


सऊदी अरब की पाइपलाइन पर हमले का प्रभाव

जानकारी के अनुसार, कीमतों में यह वृद्धि सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमले की वजह से हुई है। यह पाइपलाइन प्रतिदिन लगभग 70 लाख बैरल कच्चा तेल ले जाने की क्षमता रखती है। यदि इसकी आपूर्ति में लंबे समय तक रुकावट आती है, तो वैश्विक बाजार में लगभग चार प्रतिशत तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे पहले से ही दबाव में चल रहे तेल बाजार में और चिंता बढ़ गई है।


सऊदी अरब की भूमिका

सऊदी अरब विश्व के प्रमुख तेल उत्पादकों में से एक है और इसकी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका है। ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों को लाल सागर के पश्चिमी तट से जोड़ती है, जिससे फारस की खाड़ी के समुद्री रास्ते के अलावा अन्य मार्गों से तेल का निर्यात संभव होता है।


निर्यात में कमी

रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के लाल सागर स्थित यनबू बंदरगाह में केवल पांच से सात दिनों के निर्यात के लिए पर्याप्त तेल बचा है। इस बीच, यमन के हूती बल लाल सागर में अपने नियंत्रण को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे इस क्षेत्र में जहाजों और तेल की आपूर्ति को लेकर जोखिम बढ़ गया है।


विशेषज्ञों की राय

हालांकि, बाजार के विशेषज्ञ पूरी तरह से निराश नहीं हैं। आईएनजी के वस्तु बाजार रणनीतिकारों का कहना है कि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को हुए संभावित नुकसान की गंभीरता और इसकी बंद रहने की अवधि के बारे में अभी स्पष्टता नहीं है। उनके अनुसार, स्थिति तेजी से बदल रही है और होर्मुज स्ट्रेट से अभी भी बड़ी मात्रा में तेल की आवाजाही जारी है।


भविष्यवाणी

आईएनजी के वॉरेन पैटरसन और ईवा मैन्टे ने वर्ष की अंतिम तिमाही के लिए ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया है। हालांकि, यह अनुमान इस बात पर निर्भर करता है कि मौजूदा संकट कितनी देर तक चलता है और प्रमुख समुद्री मार्गों पर तेल की आवाजाही कितनी प्रभावित होती है।


महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग

गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यदि इस मार्ग पर लंबे समय तक बाधा बनी रहती है, तो वैश्विक तेल कीमतों में और वृद्धि हो सकती है, जिसका असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर भी पड़ेगा।


राजनीतिक बयान

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बारे में एक विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान में बना रह सकता है और वहां के तेल को अपने नियंत्रण में रख सकता है। ट्रंप ने वेनेजुएला का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका युद्ध से बाहर निकल सकता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर ईरान में रुकने का विकल्प मौजूद है।


कूटनीतिक प्रयासों की अनिश्चितता

ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने के बाद पेट्रोल की कीमतों में तेजी से गिरावट आ सकती है। हालांकि, शांति की संभावना फिलहाल स्पष्ट नहीं है। ओमान में प्रस्तावित बैठक भी रद्द कर दी गई है, जिससे कूटनीतिक समाधान की अनिश्चितता बढ़ गई है।


कच्चे तेल का बाजार

इस प्रकार, कच्चे तेल का बाजार वर्तमान में हमलों, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयासों के परिणामों पर निर्भर है। आने वाले दिनों में पाइपलाइन की स्थिति और होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही ही कीमतों की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।