☰
×

मध्य पूर्व में तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी आई है। यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर हमलों की खबरों के बाद, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 3% से अधिक बढ़ गईं। ब्रेंट कच्चा तेल 108 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। इस स्थिति का वैश्विक तेल आपूर्ति पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। जानें इस संकट का बाजार पर क्या असर हो सकता है और अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों का क्या महत्व है।
 

कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर से तेजी आई है। यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर नए हमलों की सूचना के बाद, गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 3% से अधिक बढ़ गईं। इन हमलों में सरकारी ऊर्जा कंपनी अरामको की सुविधाओं को निशाना बनाने का दावा किया गया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर पहले से मौजूद दबाव और बढ़ गया है.


ब्रेंट कच्चा तेल की स्थिति

ब्रेंट कच्चा तेल, जो वैश्विक तेल कीमतों का एक प्रमुख मानक है, गुरुवार को 108 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। बाद में, नवंबर के लिए ब्रेंट वायदा 106.50 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बंद हुआ।


हूती विद्रोहियों के हमले

जानकारी के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में एक संवेदनशील ठिकाने और लाल सागर के किनारे स्थित यानबू शहर में अरामको की सुविधाओं पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है। हूती समूह के अनुसार, दोनों हमलों ने अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया है, जैसा कि यमन समाचार एजेंसी द्वारा जारी बयान में कहा गया है.


सऊदी गठबंधन की प्रतिक्रिया

सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन बलों ने कहा है कि उन्होंने हूती विद्रोहियों द्वारा दागी गई 6 बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक दिया है। हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि इन हमलों से कोई नुकसान हुआ है या कोई हताहत हुआ है। अरामको ने भी इस मामले पर सामान्य कार्य समय के बाहर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.


अरामको का महत्व

यह ध्यान देने योग्य है कि अरामको दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में से एक है, जो वैश्विक तेल मांग का लगभग 10% पूरा करती है। ऐसे में, इसकी तेल सुविधाओं या आपूर्ति मार्गों पर किसी भी बड़े हमले से बाजार में चिंता बढ़ सकती है। तेल व्यापार में यह डर बना रहता है कि किसी प्रमुख उत्पादक देश पर हमले से उत्पादन या आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.


अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयास

मध्य पूर्व में हालिया तनाव उस समय बढ़ा है जब अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयास फिर से शुरू हुए हैं। दोनों देशों के बीच बातचीत संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान न्यूयॉर्क में आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने गुरुवार को उम्मीद जताई कि अमेरिका युद्ध समाप्त करने से संबंधित पहले के समझौता ज्ञापन पर लौटेगा.


भविष्य की संभावनाएँ

यह मेमोरेडम ऑफ अंडरस्टैडिंग अगस्त के मध्य में बिना किसी शांति समझौते के समाप्त हो गया था। पेजेशकियन ने नवंबर में होने वाले अमेरिका के मध्यावधि चुनाव से पहले इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई है. सिंगापुर की स्पार्टा कमोडिटीज की सीनियर विश्लेषक जून गोह ने भी कहा कि ईरान से जुड़ा युद्ध जारी रहने तक तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने की संभावना है.


ऊर्जा बाजार पर प्रभाव

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि का प्रभाव केवल ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं है। महंगे कच्चे तेल के कारण परिवहन, उत्पादन और कई आवश्यक वस्तुओं की लागत में वृद्धि हो सकती है। इस प्रकार, मध्य पूर्व में जारी तनाव और आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा पर वैश्विक बाजारों की नजर बनी हुई है.