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महंगाई के नए आंकड़े: जुलाई में खुदरा महंगाई में वृद्धि

जुलाई में खुदरा महंगाई 4.45 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो भारतीय रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि, विशेषकर अदरक, लहसुन और प्याज की कीमतों में, इस वृद्धि का मुख्य कारण है। ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई का दबाव अधिक है, और विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है। जानें इस स्थिति का RBI की मौद्रिक नीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
 

महंगाई के नए आंकड़े


नई दिल्ली: महंगाई के ताजा आंकड़े आम जनता के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। जुलाई में खुदरा महंगाई चौथे महीने लगातार बढ़कर 4.45 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह लगातार दूसरा महीना है जब महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर रही है, और इसका मुख्य कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि है।


जुलाई में महंगाई का बढ़ना

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के अनुसार, जुलाई में खुदरा महंगाई 4.45 प्रतिशत रही, जबकि जून में यह 4.38 प्रतिशत थी। अप्रैल में महंगाई केवल 3.48 प्रतिशत थी, जिससे यह स्पष्ट है कि कुछ महीनों में इसमें लगभग एक प्रतिशत की वृद्धि हुई है। खाद्य महंगाई भी जून के 5.32 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई में 5.52 प्रतिशत हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 5.79 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 5.05 प्रतिशत दर्ज की गई। ग्रामीण उपभोक्ताओं पर कीमतों का दबाव लगातार बना हुआ है।


महंगाई में योगदान देने वाले खाद्य पदार्थ

जुलाई के आंकड़ों में रसोई में उपयोग होने वाली कुछ आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि ने योगदान दिया। अदरक की कीमत में एक साल में 83.62 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि लहसुन की महंगाई 35.36 प्रतिशत रही। प्याज की कीमत भी 22.54 प्रतिशत बढ़ गई। हालांकि, टमाटर की कीमत में 4.59 प्रतिशत और आलू में 16.56 प्रतिशत की गिरावट आई। दूसरी ओर, चांदी के आभूषणों की कीमतों में 109.84 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई, जबकि सोने, हीरे और प्लैटिनम के आभूषण भी महंगे हुए।


ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई का दबाव

जुलाई में ग्रामीण खुदरा महंगाई 4.84 प्रतिशत रही, जो जून के 4.74 प्रतिशत से अधिक है। शहरी महंगाई भी मामूली बढ़कर 3.96 प्रतिशत पर पहुंच गई। सेवाओं में भी कीमतों का दबाव देखा गया। रेस्तरां और आवास सेवाओं की महंगाई 7.72 प्रतिशत रही, जबकि परिवहन से जुड़ी महंगाई 4.43 प्रतिशत दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश, जलाशयों का स्तर, कच्चे तेल की कीमत और इनपुट लागत आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा को प्रभावित करेंगे।


RBI की ब्याज दरों पर प्रभाव

महंगाई में निरंतर वृद्धि के कारण अब RBI की मौद्रिक नीति पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। हाल ही में केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा था। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है। ICRA ने अगस्त में इसके 4.7 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान लगाया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि खाद्य और अन्य वस्तुओं की कीमतों का दबाव बना रहता है, तो दिसंबर 2026 की बैठक में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना बढ़ सकती है।