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महंगाई पर भारतीय रिजर्व बैंक के भीतर भिन्न दृष्टिकोण

भारतीय रिजर्व बैंक में महंगाई को लेकर विभिन्न दृष्टिकोण सामने आए हैं। गवर्नर संजय मल्होत्रा महंगाई में राहत की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि समिति की सदस्य पूनम गुप्ता ने ब्याज दरों में कटौती के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है। कच्चे तेल की कीमतें और जलवायु परिवर्तन जैसे कारक महंगाई पर प्रभाव डाल सकते हैं। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
 

महंगाई पर विभिन्न राय

भारतीय रिजर्व बैंक में महंगाई के मुद्दे पर विभिन्न विचार सामने आ रहे हैं। अगस्त में आयोजित मौद्रिक नीति समिति की बैठक के ब्योरे से यह स्पष्ट होता है कि गवर्नर संजय मल्होत्रा महंगाई में राहत की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि समिति की सदस्य पूनम गुप्ता ने ब्याज दरों में कटौती के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है।


गवर्नर का दृष्टिकोण

बुधवार को जारी बैठक के ब्योरे के अनुसार, संजय मल्होत्रा ने बताया कि वर्तमान महंगाई का मुख्य कारण आपूर्ति से संबंधित झटके हैं। उन्होंने कहा कि अभी ऐसे संकेत नहीं हैं जो यह दर्शाते हों कि कीमतों का दबाव अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से फैल रहा है। मूल महंगाई वर्तमान में सीमित स्तर पर बनी हुई है।


महंगाई का अनुमान

गवर्नर के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई औसतन लगभग 5 प्रतिशत रह सकती है। उनका मानना है कि महंगाई तीसरी तिमाही में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद धीरे-धीरे कम हो सकती है। हालांकि, लोगों की महंगाई के प्रति उम्मीदों में थोड़ी वृद्धि हुई है, लेकिन वे अभी भी नियंत्रण में हैं।


आर्थिक गतिविधियों पर विश्वास

संजय मल्होत्रा ने भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया है। उनका कहना है कि देश की आर्थिक गतिविधियां आगे भी मजबूत बनी रह सकती हैं। महंगाई से जुड़े जोखिमों के बावजूद, रिजर्व बैंक को आर्थिक वृद्धि में कोई बड़ी कमजोरी नहीं दिखती।


पूनम गुप्ता का सख्त रुख

वहीं, मौद्रिक नीति समिति की सदस्य पूनम गुप्ता का दृष्टिकोण कुछ अलग और अधिक सख्त है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में ब्याज दरों में और कटौती की संभावना नहीं दिखती। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि साल के दौरान ब्याज दर बढ़ाने की आवश्यकता भी हो सकती है।


कच्चे तेल की कीमतें

पूनम गुप्ता ने कच्चे तेल की कीमतों को महंगाई के लिए एक बड़ा जोखिम बताया है। उनके अनुसार, पूरे वर्ष कच्चे तेल की औसत कीमत लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। यदि ऊर्जा की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका प्रभाव परिवहन, उत्पादन और अन्य वस्तुओं की लागत पर पड़ेगा।


जलवायु और कृषि का प्रभाव

भारत में महंगाई पर खाद्य वस्तुओं के दाम, ईंधन और मौसम का काफी प्रभाव होता है। इसी संदर्भ में समिति के सदस्य सौगत भट्टाचार्य ने अनियमित मानसून और अल नीनो की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि बारिश के वितरण में बदलाव और कृषि उत्पादन पर इसका असर महंगाई के लिए सीधा जोखिम पैदा कर सकता है।


महंगाई पर नजर रखने की आवश्यकता

समिति के सदस्य राम सिंह ने महंगाई की दिशा पर लगातार नजर रखने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, घरेलू आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए महंगाई और आर्थिक वृद्धि दोनों पहलुओं पर समान ध्यान देना आवश्यक है।


रिजर्व बैंक की स्थिति

बैठक के ब्योरे से यह स्पष्ट है कि रिजर्व बैंक के भीतर महंगाई के मुद्दे पर एकमत नहीं है। एक ओर महंगाई में नरमी की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर तेल, मानसून और खाद्य कीमतों जैसे जोखिम ब्याज दरों के निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं। आने वाले महीनों में महंगाई के आंकड़े मौद्रिक नीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।