महंगाई में वृद्धि: जीएसटी कटौती के बाद भी कीमतें बढ़ीं
जीएसटी में कटौती का प्रभाव
केंद्र सरकार ने 22 सितंबर को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में बदलाव किया था, जिसमें 12% और 28% के स्लैब को समाप्त कर दिया गया। इसके स्थान पर 5% और 18% के दो मुख्य स्लैब लागू किए गए। लग्जरी सामान और तंबाकू उत्पादों को 40% के स्लैब में रखा गया। इस बदलाव का असर यह हुआ कि कारों और खाद्य सामग्रियों की कीमतों में कमी आई, लेकिन यह स्थिति लंबे समय तक नहीं टिक सकी।
युद्ध का प्रभाव
28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ, जिसका सीधा असर तेल निर्यात पर पड़ा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से गैस और तेल की आपूर्ति में बाधा आई, जिससे महंगाई बढ़ी।
महंगाई की स्थिति
एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की निगरानी सूची में शामिल 80% वस्तुओं के दाम 21 सितंबर 2025 की तुलना में बढ़ चुके हैं। इसका मतलब है कि जीएसटी कटौती के बाद सस्ते दिन अब महंगे दिनों में बदल गए हैं।
किस-किस चीज के बढ़े दाम?
रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी में बदलाव से पहले कंडेंस्क मिल्क (अमूल मिठाई, 100 ग्राम) की कीमत 40 रुपये थी, जो अब बढ़कर 42 रुपये हो गई है। जीएसटी कटौती के बाद इसकी कीमत 37.6 रुपये थी।
28 फरवरी को युद्ध शुरू होने पर एक किलो अमूल घी की कीमत 645 रुपये थी, जो अब 665 रुपये हो गई है।
800 ग्राम पारले बिस्किट की कीमत 89 रुपये से बढ़कर 95 रुपये हो गई है।
50 किलो सीमेंट की बोरी की कीमत 410 रुपये हो चुकी है, जबकि 28 फरवरी को यह 365 रुपये थी।
टैल्कम पाउडर की कीमत 190 रुपये से बढ़कर 210 रुपये हो गई है।
एक किलो बादाम की कीमत 800 रुपये से बढ़कर 900 रुपये हो गई है।
जिलेट की 70 ग्राम की सेविंग क्रीम की कीमत 88 रुपये हो गई है।
डाइकिन की डेढ़ टन की एसी की कीमत 34490 रुपये से बढ़कर 39765 रुपये हो गई है।
महंगाई के कारण
रिपोर्ट में बताया गया है कि नेफ्था की कीमतों में 70% तक की वृद्धि ने भी महंगाई को बढ़ाने में योगदान दिया है। नेफ्था का उपयोग कई इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों और पैकेजिंग में होता है।
इसके अलावा, धातु और अन्य पैकेजिंग सामग्रियों की कीमतों में वृद्धि भी महंगाई का कारण बनी है।