महाराष्ट्र में वैश्विक कार्यबल आवाजाही नीति-2026 की घोषणा
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की नई नीति
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को वैश्विक कार्यबल आवाजाही नीति-2026 का अनावरण किया। इस नीति का उद्देश्य विभिन्न देशों की आवश्यकताओं के अनुसार 'स्किल पासपोर्ट' विकसित करना, प्रशिक्षण कार्यक्रमों को वैश्विक रोजगार की मांग के अनुरूप ढालना और विदेशों में रोजगार के लिए सुरक्षित एवं नैतिक भर्ती प्रणाली स्थापित करना है। फडणवीस ने सह्याद्री अतिथि गृह में श्रमबल की आवाजाही पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे विभिन्न देशों में कुशल श्रमिकों की आवश्यकता का मूल्यांकन करें और महाराष्ट्र के युवाओं के लिए देश-विशेष के अनुसार 'स्किल पासपोर्ट' तैयार करें।
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के अनुसार, उन्होंने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को वैश्विक रोजगार की आवश्यकताओं के अनुरूप अपने पाठ्यक्रमों में संशोधन करने और विदेशों में रोजगार के लिए सुरक्षित भर्ती प्रणाली विकसित करने का भी निर्देश दिया। 'सर्कुलर मोबिलिटी ऑफ टैलेंट' विषय पर आयोजित इस सम्मेलन का संयुक्त आयोजन महाराष्ट्र इंस्टिट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन (मित्र), प्रोटोकॉल विभाग, कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार विभाग और महाराष्ट्र एजेंसी फॉर होलिस्टिक इंटरनेशनल मोबिलिटी एंड एडवांसमेंट (महिमा) ने किया। फडणवीस ने कहा, 'दुनियाभर में बदलती जनसांख्यिकी और बढ़ती उम्र की जनसंख्या के कारण कुशल श्रमिकों की मांग में वृद्धि हो रही है।'
उन्होंने यह भी कहा कि भारत के युवा कार्यबल में इस वैश्विक मांग को पूरा करने की क्षमता है। कुशल श्रमिकों को अंतरराष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की आवश्यकता है। भारत ने लगभग 28 देशों के साथ श्रम आवाजाही समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा, निर्माण और विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में कुशल श्रमिकों की मांग है।