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महाराष्ट्र सरकार ने घरेलू एयरलाइनों के लिए एटीएफ पर वैट घटाया

महाराष्ट्र सरकार ने घरेलू एयरलाइनों के लिए एयर टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पर वैट को 18% से घटाकर 7% करने का निर्णय लिया है। यह कदम मध्य पूर्व संकट के चलते उठाया गया है, जिससे एयरलाइनों को राहत मिलेगी। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने इस निर्णय के लिए राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया है। इस कमी से यात्रियों को लाभ होगा और हवाई किराए में वृद्धि को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
 

महाराष्ट्र सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय

मध्य पूर्व में चल रहे संकट के मद्देनजर, महाराष्ट्र सरकार ने घरेलू एयरलाइनों के समर्थन के लिए एयर टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पर वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) को 18 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है।


केंद्र सरकार ने राज्यों से एटीएफ पर वैट कम करने की अपील की थी ताकि घरेलू एयरलाइनों को सहायता मिल सके।


महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन में बताया गया है कि महाराष्ट्र वैल्यू एडेड टैक्स एक्ट, 2002 के तहत एटीएफ पर वैट को 15 मई, 2026 से 14 नवंबर, 2026 तक के लिए घटाया गया है।


केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने इस निर्णय के लिए महाराष्ट्र सरकार का आभार व्यक्त किया।


एटीएफ की कीमतों में राहत

नायडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण भारतीय विमानन उद्योग को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे हवाई क्षेत्र का बंद होना और एटीएफ की कीमतों में वृद्धि।


उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए एटीएफ की कीमतों पर सीमा निर्धारित करने और हवाई अड्डे के शुल्कों में कमी करने जैसे कई उपाय किए हैं।


उन्होंने यह भी बताया कि विमानन उद्योग के महत्वपूर्ण खर्चों में से एक राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाने वाला एटीएफ पर वैट है। नागर विमानन मंत्रालय इस वैट को कम करने के लिए राज्य सरकारों के साथ बातचीत कर रहा था।


महाराष्ट्र सरकार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का आभार व्यक्त करते हुए नायडू ने कहा कि इस निर्णय से एटीएफ पर वैट को 18 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत करने की अधिसूचना जारी की गई है, जो आज से प्रभावी है।


यात्री ट्रैफिक में वृद्धि

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि महाराष्ट्र में 16 एयरपोर्ट्स संचालित हैं और यहां देश में सबसे अधिक यात्री ट्रैफिक है, जो लगभग 7.5 करोड़ यात्रियों का है।


वैट में यह कमी इन सभी एयरपोर्ट्स पर उड़ान संचालन में सहायता करेगी, जिससे बड़ी संख्या में यात्रियों को लाभ मिलेगा और वैश्विक चुनौतियों के बीच हवाई किराए में वृद्धि को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।