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मेटा ने प्रधानमंत्री मोदी की पोस्ट हटाने पर मांगी माफी, सरकार ने दी सख्त प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 23 जुलाई की सोशल मीडिया पोस्ट को अस्थायी रूप से हटाने के मामले में मेटा ने माफी मांगी है। हालांकि, सरकार ने इसे अपर्याप्त मानते हुए और जानकारी की मांग की है। इस विवाद के पीछे मेटा की तकनीकी गड़बड़ी का हवाला दिया गया है। जानें इस मामले में सरकार का क्या रुख है और मेटा ने आगे क्या कदम उठाने का प्रस्ताव दिया है।
 

मेटा की गलती पर सरकार का सख्त रुख

नई दिल्ली, 28 जुलाई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 23 जुलाई को की गई एक सोशल मीडिया पोस्ट को अस्थायी रूप से हटाने के मामले में सरकार के कड़े रुख के बाद, वैश्विक तकनीकी कंपनी मेटा ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी है। हालांकि, सरकार ने मेटा के स्पष्टीकरण को अपर्याप्त मानते हुए और जानकारी की मांग की है। इस संदर्भ में मेटा के वैश्विक लोक नीति प्रमुख को तलब किया गया था।


सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि मेटा ने प्रधानमंत्री मोदी की पोस्ट हटाने की गलती स्वीकार की है। लेकिन सरकार इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है और अधिक जानकारी चाहती है। कृष्णन ने कहा, “यह सकारात्मक है कि उन्होंने माफी मांगी है, लेकिन हम उनके स्पष्टीकरण से खुश नहीं हैं। यह पर्याप्त नहीं है।”


यह विवाद तब शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री मोदी की 23 जुलाई की पोस्ट फेसबुक पर कुछ समय के लिए प्रतिबंधित दिखाई दी।


इस पोस्ट में मोदी ने युवाओं से परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के मामलों में कड़े कदम उठाने का आश्वासन दिया था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक स्क्रीनशॉट में यह संदेश था कि उक्त सामग्री ‘कानूनी अनुरोध के कारण आपके क्षेत्र में उपलब्ध नहीं है।’ इससे विवाद और बढ़ गया। सरकारी सूत्रों ने बताया कि मेटा ने इस घटना के लिए अपने स्वचालित एआई आधारित कंटेंट फिल्टर में आई तकनीकी गड़बड़ी को जिम्मेदार ठहराया है।


कंपनी ने कहा कि प्रधानमंत्री का पोस्ट गलती से हटा दिया गया था, जिसे बाद में बहाल कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार, मेटा ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए बड़ी हस्तियों के खातों को विशेष सुरक्षा दायरे में रखा जाएगा। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि केवल तकनीकी गड़बड़ी का हवाला देना पर्याप्त नहीं है और मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है।


सरकार का मानना है कि यदि मेटा की एआई प्रणाली में खामी है, तो उसे अपने तकनीकी ढांचे में सुधार करना चाहिए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को भारतीय कानूनों का पालन करना होगा। सरकारी सूत्रों ने कहा कि यह मामला केवल एक पोस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि सामग्रियों की निगरानी और डिजिटल प्लेटफार्म की जवाबदेही से जुड़ा है।


उन्होंने जोर दिया कि मेटा की वैश्विक टीमों को भारत सरकार की चिंताओं से अवगत कराया जाना चाहिए और स्थानीय टीमों को बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना होगा। पिछले कुछ हफ्तों में मेटा कई नियामकीय मुद्दों के कारण सरकार के रडार पर रही है। इससे पहले, सरकार ने व्हाट्सऐप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी और पहचान की चोरी का खतरा बढ़ सकता है।


इसके अलावा, इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक सामग्री को लेकर भी कंपनी को नोटिस जारी किया गया था। इस बीच, संसद की एक समिति ने भी सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के नियमन पर चर्चा के लिए मेटा सहित प्रमुख कंपनियों और संबंधित मंत्रालयों के अधिकारियों को तीन अगस्त को तलब किया है। एआई युग में डिजिटल प्लेटफार्मों की भूमिका बढ़ने के साथ ही उनकी जवाबदेही, पारदर्शिता और उपयोगकर्ता अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता बन गई है।


साइबर कानून विशेषज्ञ पवन दुग्गल ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म भारतीय कानूनों को हल्के में नहीं ले सकते। उन्होंने कहा कि यदि कंपनियां बार-बार तकनीकी गड़बड़ी का हवाला देती हैं, तो उनकी कानूनी सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।