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मोरबी का सिरेमिक उद्योग संकट में, गैस आपूर्ति बाधित

गुजरात के मोरबी में सिरेमिक उद्योग गंभीर संकट में है, जहां गैस आपूर्ति में बाधा के कारण उत्पादन ठप होने की संभावना है। उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि स्थिति जल्दी सामान्य नहीं होती, तो फैक्ट्रियों को बंद करना पड़ सकता है। इस संकट का असर लाखों मजदूरों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। जानें इस संकट के पीछे के कारण और उद्योग की भविष्य की चुनौतियों के बारे में।
 

गुजरात के मोरबी में सिरेमिक उद्योग की स्थिति

गुजरात के मोरबी में स्थित सिरेमिक उद्योग वर्तमान में गंभीर संकट का सामना कर रहा है। उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि खाड़ी क्षेत्र से गैस की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो यहां की फैक्ट्रियों को बंद करना पड़ सकता है।


वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और अमेरिका-इजरायल तथा ईरान के बीच चल रहे टकराव का प्रभाव अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ने लगा है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के कारण खाड़ी क्षेत्र से गैस और पेट्रोलियम की खेपों पर असर पड़ा है। यह जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस मार्गों में से एक माना जाता है।


सिरेमिक उद्योग की गैस पर निर्भरता

मोरबी का सिरेमिक उद्योग प्राकृतिक गैस और प्रोपेन गैस पर निर्भर करता है। टाइल्स और अन्य सिरेमिक उत्पादों के निर्माण में भट्टियों को जलाने और सुखाने के लिए गैस का उपयोग किया जाता है।


गैस आपूर्ति में कमी

मोरबी सिरेमिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज अरवडिया ने बताया कि खाड़ी देशों से गैस और पेट्रोलियम की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कई खेपें होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अटकी हुई हैं। वर्तमान में उद्योग के लिए गैस की नियमित आपूर्ति रुक गई है।


स्टॉक की कमी

अरवडिया ने कहा कि प्रोपेन गैस का स्टॉक रखने वाली कंपनियों के पास केवल तीन से चार दिन का भंडार बचा है। वहीं, गुजरात गैस लिमिटेड से मिलने वाली सीएनजी की आपूर्ति का अनुमानित भंडार लगभग एक सप्ताह तक चल सकता है।


उद्योग पर खतरा

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मौजूदा युद्ध जैसी स्थिति बनी रहती है, तो अगले एक सप्ताह या दस दिनों में मोरबी सिरेमिक उद्योग को कामकाज बंद करने की नौबत आ सकती है।


अन्य उद्योग प्रतिनिधियों की चिंताएं

मोरबी सिरेमिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के वॉल टाइल्स डिवीजन के अध्यक्ष हरेश बोपालिया ने भी इसी तरह की चिंताओं का इजहार किया है। उनके अनुसार, प्राकृतिक गैस और प्रोपेन की सप्लाई चेन प्रभावित हो चुकी है, जिससे उद्योग इकाइयों तक समय पर ईंधन नहीं पहुंच पा रहा है।


रोजगार पर प्रभाव

मोरबी में लगभग 600 सिरेमिक उत्पादन इकाइयां हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग रोजगार से जुड़े हुए हैं। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि गैस आपूर्ति बाधित रहती है, तो इन सभी इकाइयों को बंद करना पड़ सकता है।


मजदूरों की आजीविका पर खतरा

मोरबी के सिरेमिक उद्योग में सीधे तौर पर दो से तीन लाख मजदूर काम करते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से लगभग चार लाख लोगों की आजीविका इस क्षेत्र से जुड़ी हुई है। ऐसे में उद्योग बंद होने की स्थिति में मजदूरों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।


प्रोपेन गैस की आपूर्ति में बाधा

उद्यमी मणिभाई बावरवा ने बताया कि मोरबी की लगभग 80 प्रतिशत इकाइयां प्रोपेन गैस पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि 23 फरवरी को सऊदी अरब के एक बंदरगाह पर हुए हादसे के बाद से प्रोपेन की आपूर्ति प्रभावित हुई थी।


भविष्य की चुनौतियां

एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष मुकेश कुंदरिया ने चेतावनी दी है कि यदि यह संघर्ष एक या दो सप्ताह तक जारी रहता है, तो उद्योग 30 से 45 दिनों तक बंद रह सकता है। यदि स्थिति चार सप्ताह तक बनी रहती है, तो उत्पादन शुरू करना मुश्किल हो सकता है।