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यूपीआई पर टैक्स: सरकार की नई नीति और इसके प्रभाव

सरकार ने यूपीआई के माध्यम से लेनदेन पर शुल्क लगाने की घोषणा की है, जिससे एक नए टैक्स मंत्रालय की आवश्यकता महसूस हो रही है। यह शुल्क वास्तव में एक टैक्स है, जिसका बोझ आम नागरिकों पर पड़ेगा। सरकार का दावा है कि 96% लेनदेन 2000 रुपए से कम के हैं, इसलिए उन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। लेकिन क्या यह सही है? जानें इस नई नीति के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

यूपीआई पर टैक्स लगाने की आवश्यकता


सरकार ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से लेनदेन पर शुल्क लगाने की घोषणा की है, जिससे एक नए टैक्स मंत्रालय की आवश्यकता महसूस हो रही है। इसे शुल्क कहा जा रहा है, लेकिन यह वास्तव में एक टैक्स है, जिसका बोझ आम नागरिकों पर पड़ेगा। यह विचार करना जरूरी है कि टैक्स और मृत्यु ही जीवन की दो सच्चाइयाँ हैं। मोदी सरकार ने इस सत्य को और भी स्पष्ट कर दिया है।


हालांकि, सरकार का दावा है कि उसने जीएसटी के माध्यम से एक देश, एक टैक्स का नियम लागू किया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि नागरिकों को अभी भी कई प्रकार के टैक्स चुकाने पड़ते हैं। चाहे वह आयकर हो, जीएसटी, वैट, सेस या टोल शुल्क।


यूपीआई को पहले एक तकनीकी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया था, लेकिन अब उस पर भी शुल्क लगाया जा रहा है। सरकार का कहना है कि 96% लेनदेन 2000 रुपए से कम के हैं, इसलिए उन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। लेकिन यह आंकड़ा misleading है, क्योंकि चार प्रतिशत लेनदेन का मूल्य 66% है।


सरकार का तर्क है कि चार प्रतिशत लेनदेन पर 0.40% शुल्क लगाना आवश्यक है, लेकिन क्या यह सही है? यूपीआई का संचालन करने वाली संस्था, एनपीसीआई, लाभ कमाने वाली संस्था है और उसे घाटा नहीं होता।


बैंकों की कुल कमाई 4.11 लाख करोड़ रुपए है, जबकि रिजर्व बैंक ने सरकार को 2.87 लाख करोड़ रुपए का लाभांश दिया है। ऐसे में, डिजिटल बैंकिंग पर अतिरिक्त शुल्क वसूलने का क्या औचित्य है?


सरकार का कहना है कि व्यापारी शुल्क का भुगतान करेगा, लेकिन अंततः यह ग्राहक पर ही बोझ बनेगा। यह एक नया टैक्स है, जो जनता पर लगाया जा रहा है। यूपीआई के माध्यम से होने वाले लेनदेन पर शुल्क लगाना सरकार की जनविरोधी नीति को दर्शाता है।


सरकार को यह समझना चाहिए कि जब हर चीज पर टैक्स है, तो एक टैक्स मंत्रालय का गठन किया जाना चाहिए, जो यह सुनिश्चित करे कि टैक्स का सही तरीके से संग्रह किया जाए।