×

यूपीआई लेनदेन पर व्यापारी शुल्क पर समिति का जल्द निर्णय

व्यापारियों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क को लेकर एक समिति जल्द निर्णय लेने वाली है। इस समिति में प्रमुख बैंकों और सेवा प्रदाताओं के प्रतिनिधि शामिल हैं। सरकार ने पहले ही स्पष्ट किया है कि 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पूरी तरह से मुफ्त रहेंगे। जानें इस निर्णय के पीछे के कारण और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया के बारे में।
 

यूपीआई लेनदेन पर व्यापारी शुल्क का निर्णय

व्यापारियों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर लागू होने वाले शुल्क के संबंध में बैंकों, सेवा प्रदाताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों की एक समिति शीघ्र निर्णय लेने वाली है। इस समिति में भारतीय बैंक संघ (आईबीए) और पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) सहित 22 सदस्य शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, यह समिति आत्मनिर्भरता और बाजार विस्तार जैसे विभिन्न पहलुओं के आधार पर व्यापारी छूट दर (एमडीआर) निर्धारित करने पर विचार कर रही है।


उदाहरण के लिए, ब्राजील में पिक्स प्रणाली के तहत व्यापारी शुल्क लगभग 0.33 प्रतिशत है, जबकि चीन में यह 0.40 प्रतिशत है। सरकार ने सोमवार को स्पष्ट किया कि ग्राहकों से व्यापारियों को रुपे डेबिट कार्ड के माध्यम से 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पूरी तरह से मुफ्त रहेंगे। इसके अतिरिक्त, व्यक्तियों के बीच होने वाले सभी यूपीआई लेनदेन भी पहले की तरह बिना किसी शुल्क के जारी रहेंगे।


सरकार ने 14 सितंबर को जारी एक राजपत्र अधिसूचना में कहा कि कोई भी बैंक या प्रणाली प्रदाता रुपे डेबिट कार्ड या 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन के माध्यम से भुगतान करने या प्राप्त करने वाले किसी भी व्यक्ति पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं लगाएगा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विपक्षी दल कांग्रेस ने मंगलवार को यूपीआई लेनदेन पर जारी अधिसूचना को लेकर सरकार पर आरोप लगाया कि उसने ऐसे लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता चुपचाप खोल दिया है। यह अधिसूचना भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10ए में संशोधन के बाद आई है, जो यूपीआई और अन्य इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर एमडीआर लगाने के लिए एक ढांचा प्रदान करती है।


यह संशोधन विधेयक इस वर्ष अगस्त में मानसून सत्र के दौरान संसद द्वारा पारित किया गया था। संसद में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि यूपीआई भुगतान उपभोक्ताओं के लिए पूरी तरह से मुफ्त रहेगा और भविष्य में कोई भी शुल्क केवल व्यापारी लेनदेन की विशिष्ट श्रेणियों पर लागू होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क किनारे की दुकानों और रेहड़ी-पटरी वालों को किए जाने वाले छोटे भुगतान सहित अधिकांश व्यापारी लेनदेन मुफ्त बने रहेंगे।


वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘सड़क किनारे के विक्रेताओं को किए जाने वाले सामान्य और छोटे मूल्य के भुगतान सहित अधिकांश व्यापारी लेनदेन मुफ्त रहेंगे। भविष्य में कोई भी एमडीआर केवल एक निर्धारित सीमा से ऊपर व्यापारी लेनदेन की सीमित श्रेणी पर लागू होगा।’’ यूपीआई का संचालन भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) द्वारा किया जाता है, जो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय बैंक संघ की एक पहल है।