रिजर्व बैंक की बैठक: ब्याज दरों में संभावित वृद्धि और महंगाई की चिंता
बाजार की नजरें रिजर्व बैंक की बैठक पर
महंगाई और आर्थिक दबाव के बीच, रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की आगामी बैठक पर बाजार की पूरी नजर है। 21 लगातार बैठकों में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होने के बाद, 7 अक्टूबर को रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में 25 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि की संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो रेपो दर 5.5% तक पहुंच जाएगी, जो फरवरी 2023 के बाद पहली बार होगा।
महंगाई के कारणों पर चर्चा
हालिया जानकारी के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, वैश्विक ब्याज दरों में वृद्धि और रुपये पर दबाव ने महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस कारण से, बाजार में दरों में वृद्धि की संभावना पहले से ही शामिल की जा चुकी है। निवेशकों की निगाहें इस बात पर होंगी कि रिजर्व बैंक आगे कितनी और कब तक ब्याज दरें बढ़ाने का संकेत देता है।
विशेषज्ञों की राय
मनीकंट्रोल द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में, 19 बाजार विशेषज्ञों में से 15 ने 25 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि की उम्मीद जताई है, जबकि 4 ने मौजूदा दरों को बनाए रखने की संभावना बताई है।
आर्थिक वृद्धि और चुनौतियाँ
भारतीय अर्थव्यवस्था ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8% की वृद्धि दर्ज की है। हालांकि, महंगे कच्चे तेल, वैश्विक बांड बाजार में बढ़ती दरें और रुपये की कमजोरी दूसरी छमाही में आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं।
ब्याज दरों के संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि 25 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि से ज्यादा महत्वपूर्ण यह होगा कि रिजर्व बैंक आगे की दरों के बारे में क्या संकेत देता है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता के अनुसार, फरवरी तक कुल मिलाकर लगभग 75 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि की संभावना बन सकती है।
महंगाई का अनुमान
महंगाई का अनुमान भी इस बैठक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। रिजर्व बैंक ने पिछली बैठक में वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 5% रखा था। अगस्त में खुदरा महंगाई जुलाई के 4.45% से बढ़कर 4.82% हो गई। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2% किया जा सकता है।
बैंकिंग प्रणाली की चुनौतियाँ
बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त नकदी भी रिजर्व बैंक के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। सितंबर की शुरुआत में यह अतिरिक्त नकदी लगभग 12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी, लेकिन रिजर्व बैंक की कार्रवाइयों के बाद यह घटकर 4-6 लाख करोड़ रुपये रह गई है।
बाहरी कारकों का प्रभाव
बाहरी परिस्थितियाँ भी रिजर्व बैंक के लिए चिंता का विषय हैं। इस सप्ताह ब्रेंट कच्चा तेल लगभग 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिका की 10 साल की सरकारी बांड दर 5.2% तक पहुंच गई। भारतीय रुपया भी 96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया है।
भविष्य की संभावनाएँ
कच्चे तेल की महंगाई और वैश्विक ब्याज दरों का दबाव रुपये को कमजोर कर सकता है, जिसका असर घरेलू कीमतों पर भी पड़ेगा। ऐसे में, बाजार को उम्मीद है कि रिजर्व बैंक ब्याज दरों में वृद्धि करेगा, लेकिन आगे की रणनीति को सोच-समझकर और धीरे-धीरे लागू करेगा।