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रिलायंस जियो का संभावित आईपीओ: भारत का सबसे बड़ा शेयर बाजार प्रवेश

रिलायंस जियो इस वर्ष शेयर बाजार में प्रवेश करने की योजना बना रही है, जिसमें 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी का आईपीओ लाने का विचार है। यदि यह सफल होता है, तो यह भारत का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है, जिसकी अनुमानित राशि 4 अरब डॉलर से अधिक होगी। जियो ने पिछले वर्षों में टेलीकॉम के अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल व्यवसाय में भी विस्तार किया है। जानें इस आईपीओ की संभावनाएं और भारतीय आईपीओ बाजार की स्थिति के बारे में।
 

रिलायंस जियो का आईपीओ लाने की योजना

रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स इस वर्ष शेयर बाजार में प्रवेश करने की योजना बना रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनी लगभग 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी का आईपीओ लाने पर विचार कर रही है। यदि यह योजना सफल होती है, तो यह भारत का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है, जिसकी अनुमानित राशि 4 अरब डॉलर से अधिक होगी।


रिलायंस जियो का महत्व

मुकेश अंबानी के नेतृत्व में, रिलायंस जियो देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है, जिसके पास 50 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं। निवेश बैंक जेफरीज ने नवंबर में जियो का मूल्यांकन लगभग 180 अरब डॉलर बताया था। इस प्रकार, 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री से लगभग 4.5 अरब डॉलर जुटाए जा सकते हैं, जो 2024 में आने वाले हुंडई मोटर इंडिया के आईपीओ से भी बड़ा आंकड़ा होगा।


विस्तार और निवेश

पिछले छह वर्षों में, जियो ने टेलीकॉम के अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल व्यवसाय में भी विस्तार किया है। कंपनी ने केकेआर, जनरल अटलांटिक, सिल्वर लेक और अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी जैसे प्रमुख वैश्विक निवेशकों से फंड जुटाए हैं। सूत्रों के अनुसार, कंपनी का इरादा सीमित हिस्सेदारी सूचीबद्ध करने का है, क्योंकि सेबी द्वारा बड़े आईपीओ के लिए न्यूनतम सार्वजनिक फ्लोट को 5 प्रतिशत से घटाकर 2.5 प्रतिशत करने के प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय की मंजूरी मिलनी बाकी है।


आईपीओ की संभावनाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि कम हिस्सेदारी की लिस्टिंग से शेयर की कीमत को लेकर बेहतर मांग उत्पन्न हो सकती है। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर-फॉर-सेल होगा या इसमें नए शेयर भी जारी किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि जियो की वार्षिक आय का एक बड़ा हिस्सा, लगभग 75 से 80 प्रतिशत, टेलीकॉम व्यवसाय से आता है।


भारतीय आईपीओ बाजार की स्थिति

यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब भारतीय आईपीओ बाजार लगातार मजबूत बना हुआ है, और 2025 में भारत प्राइमरी मार्केट से फंड जुटाने के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर रहा है। रिलायंस समूह भविष्य में अपने रिटेल व्यवसाय को भी सूचीबद्ध करने की योजना बना रहा है, हालांकि यह 2027 या 2028 से पहले संभव नहीं माना जा रहा है।


आईपीओ दस्तावेजों की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, जियो आईपीओ के दस्तावेज तैयार करने के लिए मॉर्गन स्टेनली और कोटक महिंद्रा बैंक के बैंकर प्रारंभिक स्तर पर काम कर रहे हैं। अंतिम समय सीमा बाजार की स्थिति और नियामकीय मंजूरी पर निर्भर करेगी। यह भी माना जा रहा है कि आईपीओ के जरिए कई विदेशी निवेशक अपने निवेश से आंशिक या पूर्ण एग्जिट की तलाश कर सकते हैं।