☰
×

रिलायंस जियो के सैटेलाइट कम्युनिकेशन पर तेजी से काम, लेकिन लॉन्च की तारीख अनिश्चित

रिलायंस जियो के चेयरमैन आकाश अंबानी ने कंपनी के सैटेलाइट कम्युनिकेशन योजनाओं पर तेजी से काम करने की जानकारी दी है। हालांकि, उन्होंने पहले लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट्स के लॉन्च की तारीख नहीं बताई। इस बीच, एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने की योजना बना रही है। जानें इस विषय पर और क्या कहा गया है और सरकार की प्रतिक्रिया क्या है।
 

रिलायंस जियो का सैटेलाइट कम्युनिकेशन प्लान

रिलायंस जियो इन्फोकॉम के चेयरमैन आकाश अंबानी ने बताया कि उनकी कंपनी सैटेलाइट कम्युनिकेशन योजनाओं पर तेजी से कार्य कर रही है। हालांकि, उन्होंने अपने पहले लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट्स के लॉन्च के लिए कोई निश्चित समयसीमा साझा करने से इनकार कर दिया। इंडिया मोबाइल कांग्रेस में 'इंडिया टुडे' के साथ बातचीत के दौरान, जब उनसे एलन मस्क की हालिया टिप्पणियों और सरकार की प्रतिक्रिया के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। अंबानी ने कहा कि उनका ध्यान पूरी तरह से काम पर केंद्रित है और वे अपने भारतीय ग्राहकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करना चाहते हैं।


उन्होंने यह भी कहा कि सैटेलाइट टेक्नोलॉजी ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, खासकर उन घरों के लिए जो पारंपरिक नेटवर्क की पहुंच से बाहर हैं।


सैटेलाइट कनेक्टिविटी का महत्व

अंबानी ने बताया कि सैटेलाइट टेक्नोलॉजी का उपयोग घरों में ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जियो पहले से ही इस दिशा में काम कर रहा है ताकि भारतीय घरों तक ब्रॉडबैंड सेवाएं पहुंच सकें। उनके अनुसार, सैटेलाइट कनेक्टिविटी से ब्रॉडबैंड सेवाओं की पहुंच में तेजी आएगी।


उन्होंने यह भी बताया कि जियो अपनी सैटेलाइट सेवाओं के लिए पूरी तरह से स्वदेशी तकनीकी ढांचा विकसित करने में अच्छी प्रगति कर रहा है।


स्टारलिंक की भारत में एंट्री

एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने की योजना बना रही है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों और उन इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ाना है जहाँ सुविधाएं अभी तक नहीं पहुंची हैं। कंपनी को देश में काम करने के लिए लाइसेंस मिल चुका है, लेकिन कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने से पहले उसे सुरक्षा और स्पेक्ट्रम से जुड़ी अंतिम मंजूरी का इंतजार है।


मस्क ने यह भी आरोप लगाया था कि कुछ शक्तिशाली लोग भारत में स्टारलिंक की एंट्री को रोकने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि वे अपने मौजूदा एकाधिकार को बनाए रख सकें। हालांकि, भारत सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का आवंटन एक निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।


स्टारलिंक का भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर

स्टारलिंक भारत में अपने संचालन के लिए विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा प्रणाली विकसित कर रही है। कंपनी का कहना है कि उसका सैटेलाइट नेटवर्क उन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की कमी को दूर करने में मदद कर सकता है, जहाँ पारंपरिक ब्रॉडबैंड इंफ्रास्ट्रक्चर सीमित है।