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रिलायंस समूह के पूर्व अधिकारियों की ED हिरासत में गिरफ्तारी

दिल्ली की अदालत ने रिलायंस अनिल अंबानी समूह के दो पूर्व अधिकारियों को धन शोधन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में भेज दिया है। जांच में सामने आया है कि बैंक से लिए गए ऋण की राशि को मुखौटा कंपनियों में भेजा गया था। ईडी ने इस मामले में अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना को गिरफ्तार किया है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और रिलायंस समूह का स्पष्टीकरण।
 

दिल्ली की अदालत का आदेश

दिल्ली की एक अदालत ने बृहस्पतिवार को रिलायंस अनिल अंबानी समूह के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में भेज दिया। अदालत के 24 पन्नों के आदेश में बताया गया है कि ईडी की जांच में यह खुलासा हुआ है कि बैंक से लिए गए ऋण की राशि को उन कंपनियों में भेजा गया, जिनका नियंत्रण खुद समूह के पास था।


डिजिटल सबूतों की भूमिका

आदेश में यह भी कहा गया है कि ईडी को जांच के दौरान ईमेल के रूप में मिले डिजिटल सबूतों से यह स्पष्ट हो गया है कि दोनों आरोपियों की भूमिका करोड़ों रुपये के ऋण हेराफेरी में थी। ईडी ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े इस मामले में अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना को धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया।


पूछताछ और हिरासत

झुनझुनवाला को लंबी पूछताछ के बाद मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया। उन्हें मुंबई की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां एजेंसी ने आगे की पूछताछ के लिए उनकी कस्टोडियल रिमांड मांगी।


अन्य गिरफ्तारियां

एक अन्य घटनाक्रम में, ईडी ने रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व CFO और COO अमित बापना को भी गिरफ्तार किया। बापना ने 2008 से 2020 के बीच इन पदों पर कार्य किया था और उन्हें अनिल अंबानी का करीबी सहयोगी माना जाता है।


रिलायंस समूह का स्पष्टीकरण

कोर्ट ने एजेंसी की सात दिन की हिरासत की मांग के मुकाबले, झुनझुनवाला और बापना को पांच दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है। रिलायंस ADA ग्रुप ने एक रेगुलेटरी फाइलिंग में स्पष्ट किया कि झुनझुनवाला और बापना का पिछले सात वर्षों से समूह से कोई संबंध नहीं है।


जांचकर्ताओं का आरोप

जांचकर्ताओं का कहना है कि आरोपी ऐसे शेल कंपनियों के नेटवर्क के माध्यम से बड़े पैमाने पर सार्वजनिक धन का गलत इस्तेमाल करने में शामिल हैं, जिनकी कोई वास्तविक वित्तीय स्थिति नहीं है और न ही कोई असली कारोबारी गतिविधि है।