रुपये की गिरावट: डॉलर के मुकाबले 95.50 पर पहुंचा
रुपये का नया निचला स्तर
रुपये का अब तक का सबसे निचला स्तर, सुधार की कोई उम्मीद नहीं
रुपये की गिरावट (बिजनेस डेस्क): अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। इन वैश्विक परिस्थितियों का भारतीय मुद्रा, रुपये पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। मंगलवार को, भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 19 पैसे गिरकर 95.50 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। वर्ष 2026 की शुरुआत से ही रुपये पर दबाव बना हुआ है। पिछले साल दिसंबर में, रुपये ने पहली बार 90 के स्तर को पार किया था।
रुपये में गिरावट के कारण
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के साथ संघर्ष विराम को कमजोर बताने से खाड़ी देशों में तनाव बढ़ गया है। इस स्थिति के कारण निवेशक उभरते बाजारों, जैसे भारत, से अपने निवेश को निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। ईरान संकट के चलते वैश्विक बाजार में आपूर्ति में रुकावट का डर है, जिससे ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं। भारत अपनी आवश्यकताओं का लगभग 80% तेल आयात करता है, जिससे तेल महंगा होने पर डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपये की स्थिति कमजोर होती है।
शेयर बाजार पर प्रभाव
मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में भी भारी गिरावट देखी गई। कारोबार की शुरुआत में ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान पर खुले और पूरे दिन गिरावट में बने रहे। दिन के अंत में, सेंसेक्स 1,456 अंक गिरकर 74,559 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में 436 अंक की गिरावट आई, जो 23,379 पर बंद हुआ। पिछले चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स लगभग 3,500 अंक और निफ्टी लगभग 1,000 अंक गिर चुका है।
सोने और चांदी की कीमतों में वृद्धि
जहां रुपये की कमजोरी से शेयर बाजार प्रभावित हो रहा है, वहीं सर्राफा बाजार में तेजी का रुख बना हुआ है। मंगलवार को दिल्ली सर्राफा बाजार में 99.9% शुद्धता वाले सोने का भाव 1,500 रुपये बढ़कर 1,56,800 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया। यह सोमवार के बंद भाव 1,55,300 रुपये से लगभग 1% अधिक है। चांदी की कीमतें भी 12,000 रुपये बढ़कर 2,77,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गईं, जिसमें 4.53% की वृद्धि हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की कमजोरी और स्थिर धारणा के कारण घरेलू बाजार में सोने को लाभ मिला है।