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रुपये में गिरावट: कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी डॉलर की मजबूती का प्रभाव

भारतीय रुपये में गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। इस लेख में, हम रुपये की स्थिति, अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में उसके प्रदर्शन, और घरेलू शेयर बाजार की गिरावट पर चर्चा करेंगे। जानें कि कैसे भू-राजनीतिक अस्थिरता और निवेशकों की धारणा ने रुपये को प्रभावित किया है।
 

रुपये की स्थिति

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक अस्थिरता के चलते, अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण भारतीय रुपया बृहस्पतिवार को 23 पैसे गिरकर 95.96 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा व्यापारियों के अनुसार, घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली ने भी रुपये पर दबाव डाला। निवेशकों में जोखिम लेने से बचने की प्रवृत्ति और अमेरिका में बढ़ती महंगाई की चिंताओं के चलते अमेरिकी बॉण्ड पर प्रतिफल में वृद्धि हुई, जिससे डॉलर को मजबूती मिली।


विनिमय बाजार में रुपये का प्रदर्शन

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपये की शुरुआत 95.84 प्रति डॉलर से हुई। कारोबार के दौरान, यह 95.98 के निम्नतम स्तर तक गिर गया। अंततः, रुपये ने 95.96 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद किया, जो पिछले बंद भाव से 23 पैसे की कमी दर्शाता है।


बुधवार को, रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 11 पैसे की गिरावट के साथ 95.73 पर बंद किया था। इससे पहले, रुपये में 16 पैसे की मजबूती आई थी। जिंस और मुद्रा विश्लेषक आमिर मकडा ने बताया कि ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण रुपये में यह गिरावट आई।


डॉलर की मजबूती और तेल की कीमतें

आमिर मकडा ने यह भी कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित वृद्धि की उम्मीद से डॉलर को समर्थन मिला है। इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.18 प्रतिशत बढ़कर 100.99 पर पहुंच गया। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 2.74 प्रतिशत बढ़कर 105.90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।


फरवरी के अंत में, ईरान युद्ध से पहले यह कीमत लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल थी। विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ सत्रों में स्थिर हो रही तेल कीमतें पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों में कूटनीतिक प्रगति न होने के कारण फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। अमेरिका और ईरान के अधिकारियों की न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा कार्यक्रम के दौरान हुई बैठक के बाद भी कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।


शेयर बाजार की स्थिति

घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी 1.67 प्रतिशत गिरकर 73,580.54 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 383.70 अंक यानी 1.64 प्रतिशत टूटकर 23,063.10 अंक पर आ गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार को शुद्ध रूप से 1,617.45 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे।