लोकसभा ने डिजिटल भुगतान विधेयक को दी मंजूरी, UPI पर सर्विस चार्ज लगाने का मिलेगा अधिकार
डिजिटल भुगतान विधेयक का महत्व
लोकसभा ने 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' में संशोधन करने वाले नए विधेयक को स्वीकृति प्रदान की है। इस संशोधन के बाद, सरकार को बैंकों और अन्य भुगतान सेवा प्रदाताओं को यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) समेत अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों पर 'सर्विस चार्ज' लगाने का अधिकार प्राप्त होगा।
इस कानून का मुख्य उद्देश्य उस प्रावधान को समाप्त करना है, जो बैंकों और भुगतान एग्रीगेटर कंपनियों को नोटिफाइड इलेक्ट्रॉनिक तरीकों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वसूलने से रोकता था। हालांकि, वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस विधेयक के पारित होने का मतलब यह नहीं है कि UPI लेनदेन पर तुरंत कोई चार्ज लागू होगा।
क्या व्यापारियों और ग्राहकों पर पड़ेगा असर?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट केवल व्यापारियों पर लागू होता है, ग्राहकों पर नहीं। उन्होंने यह भी बताया कि MDR चार्ज से बैंकों और फिनटेक कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा में अधिक निवेश करने में सहायता मिलेगी।
सीतारमण ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश के उस बयान का जवाब दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि UPI का उपयोग करने के लिए आम लोगों को अधिक पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि NPCI की अध्यक्षता वाली UPI और सर्विसेज़ स्टीयरिंग कमेटी को MDR पर निर्णय लेना है, और यह निर्णय संसद द्वारा टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026 के पारित होने के बाद ही होगा.
RTGS और NEFT पर पहले से लागू चार्ज
RTGS (रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट) और NEFT (नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर) के माध्यम से किए जाने वाले रियल-टाइम भुगतान पर पहले से ही सर्विस चार्ज लागू है। हालांकि, UPI लेनदेन को अब तक ऐसे चार्ज से छूट मिली हुई है। वर्तमान में, कोई भी बैंक या भुगतान प्रणाली प्रदाता, इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 269SU के तहत बताए गए इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के तरीकों का उपयोग करने के लिए किसी पर भी सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कोई चार्ज नहीं लगा सकता है.