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वाराणसी में नए एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट से बुनियादी ढांचे में सुधार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने वाराणसी के लिए एक महत्वपूर्ण एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। यह प्रोजेक्ट गंगा और वरुण नदियों के किनारे 89 किलोमीटर लंबा नेटवर्क विकसित करेगा, जिससे शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या का समाधान होगा। इस परियोजना से न केवल काशी नगरी की कनेक्टिविटी में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
 

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की मंजूरी

केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में वाराणसी के लिए एक महत्वपूर्ण रोड प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी है। इस परियोजना का उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध काशी नगरी को ट्रैफिक जाम की समस्या से स्थायी रूप से मुक्त करना है। इसके तहत गंगा और वरुण नदियों के किनारे 89 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड नेटवर्क विकसित किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट आधुनिक 'हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल' (HAM) के तहत कार्यान्वित किया जाएगा, जो एक पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल है। इस मॉडल का उपयोग भारत सरकार, विशेषकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा बड़े एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में किया जाता है। इस निर्माण से शहर के आंतरिक मार्गों पर वाहनों का दबाव काफी कम होगा।


वरुण नदी के किनारे एलिवेटेड कॉरिडोर

वरुण नदी के समानांतर बनने वाला यह कॉरिडोर उत्तर और पूर्व वाराणसी के क्षेत्रों को नई कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।


लंबाई व चौड़ाई: यह कॉरिडोर 43 किलोमीटर लंबा और 6/4 लेन का होगा।


अनुमानित लागत: इस परियोजना पर लगभग 10,998 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है।


कनेक्टिविटी: यह प्रोजेक्ट NH-31 को वाराणसी रिंग रोड से सीधे जोड़ेगा।


अंशात्मक बुनियादी ढांचा: इस मुख्य कॉरिडोर के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण फ्लाईओवरों, लूप, रैंप और दोनों तरफ सुगम सर्विस रोड का निर्माण भी किया जाएगा।


गंगा नदी के किनारे एलिवेटेड कॉरिडोर

यह परियोजना का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो शहर के दक्षिण-पूर्वी हिस्से को नई रफ्तार देगा।


लंबाई व चौड़ाई: गंगा नदी के किनारे 46 किलोमीटर लंबा, भव्य 6-लेन वाला एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा।


अनुमानित लागत: इस पर लगभग 14,448 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।


कनेक्टिविटी: यह कॉरिडोर वाराणसी और चंदौली जिलों में स्थित NH-19 (पुराना NH-2) को वाराणसी रिंग रोड से सीधे लिंक करेगा।


विशेष आकर्षण: इस कॉरिडोर में मुख्य सड़क के अलावा एक शानदार केबल-स्टेयड ब्रिज, एक्स्ट्राडोज्ड फुट ओवरब्रिज-कम-मेजर ब्रिज, कई लूप, कनेक्टिंग रैंप और सर्विस रोड शामिल होंगे।


पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी बड़ी रफ्तार

वाराणसी, जो धार्मिक राजधानी के रूप में प्रसिद्ध है, हर साल लगभग 15 करोड़ (150 मिलियन) से अधिक पर्यटकों और श्रद्धालुओं का स्वागत करता है। ये लोग बाबा विश्वनाथ के दर्शन और गंगा आरती देखने आते हैं। इस भारी आवक के कारण शहर के पारंपरिक मार्ग अक्सर जाम हो जाते हैं। इन दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण से NH-19 (प्रयागराज-वाराणसी), BHU-रामनगर रोड और NH-35 (वाराणसी-मिर्जापुर) पर ट्रैफिक का लोड न्यूनतम रह जाएगा, जिससे पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों का कीमती समय बचेगा।