वित्त मंत्री ने औद्योगिक विकास के लिए तेजी से कार्यान्वयन की आवश्यकता बताई
नई दिल्ली में औद्योगिक कॉरिडोर की समीक्षा
नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास कार्यक्रम की समीक्षा बैठक में परियोजनाओं को शीघ्रता से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बुनियादी ढांचे, निवेश और उत्पादन के साथ-साथ श्रमिकों के आवास, स्वास्थ्य, कौशल विकास और सार्वजनिक परिवहन जैसी सुविधाओं को औद्योगिक विकास की योजना में शामिल करने की बात की।
परियोजनाओं की मंजूरी से आगे बढ़कर उत्पादन पर ध्यान
सीतारमण ने राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि अब परियोजनाओं की मंजूरी से आगे बढ़कर उनके समय पर पूरा होने पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। उन्होंने भूमि आवंटन, निवेश आकर्षित करने और उत्पादन शुरू करने की प्रक्रिया में तेजी लाने की आवश्यकता बताई। सरकार के अनुसार, वर्तमान कार्यक्रम में 13 राज्यों के 20 प्रोजेक्ट और सात औद्योगिक कॉरिडोर शामिल हैं। इन परियोजनाओं के तहत लगभग 5,348 एकड़ भूमि पर 469 प्लॉट आवंटित किए जा चुके हैं।
2.21 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आवंटित भूखंडों में लगभग 2.21 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। इन परियोजनाओं से लगभग 1.29 लाख लोगों के लिए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। वर्तमान में 134 इकाइयों में उत्पादन शुरू हो चुका है, जबकि 95 इकाइयां निर्माण के चरण में हैं। चार औद्योगिक स्मार्ट सिटी—धोलेरा, शेंद्र-बिडकिन, ग्रेटर नोएडा और विक्रम उद्योगपुरी—उत्पादन के चरण में पहुंच चुकी हैं। सीतारमण ने आगे की औद्योगिक भूमि और बुनियादी ढांचे की आवश्यकता को पहले से तैयार रखने की बात भी की।
श्रमिकों की सुविधाओं पर ध्यान
वित्त मंत्री ने कहा कि औद्योगिक परियोजनाओं की योजना केवल सड़क, भूमि और कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं होनी चाहिए। श्रमिकों के लिए आवास, स्वास्थ्य सेवाएं, कौशल प्रशिक्षण और सार्वजनिक परिवहन जैसी व्यवस्थाएं भी पहले से तैयार रहनी चाहिए। उन्होंने इन परियोजनाओं के लिए पीएम गतिशक्ति के माध्यम से एकीकृत बुनियादी ढांचा योजना बनाने पर जोर दिया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी निवेशकों के लिए अनुकूल औद्योगिक माहौल बनाने की आवश्यकता बताई, जिसमें प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं और फ्लैटेड फैक्ट्रियां शामिल हों।
BHAVYA योजना पर चर्चा
बैठक में भारत औद्योगिक विकास योजना, जिसे BHAVYA कहा जाता है, की भी समीक्षा की गई। इस योजना के तहत 100 निवेश-तैयार और प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क विकसित करने का लक्ष्य है। सरकार के अनुसार, पहले चरण में राज्यों से 87 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि अधिकतम 20 परियोजनाओं को मंजूरी देने का प्रस्ताव है। पीयूष गोयल ने भारत के मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने और विभिन्न देशों तथा क्षेत्रों के लिए विशेष औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की संभावनाओं पर भी जोर दिया।