वित्त मंत्री ने यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर दी स्पष्टता
यूपीआई भुगतान पर स्थिति स्पष्ट
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूपीआई भुगतान के संदर्भ में संभावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) पर चल रही चर्चाओं को स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि आम उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य डिजिटल भुगतान प्रणाली को सशक्त बनाना है, ताकि बैंक और फिनटेक कंपनियां बेहतर सेवाएं प्रदान कर सकें।
ग्राहकों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं
सीतारमण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बताया कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट केवल व्यापारियों से संबंधित है और इसका सीधा प्रभाव ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस व्यवस्था के माध्यम से बैंक और फिनटेक कंपनियों को भुगतान प्रणाली के बुनियादी ढांचे, नई तकनीक और साइबर सुरक्षा में निवेश करने का अवसर मिलेगा, जिसका लाभ अंततः यूपीआई उपयोगकर्ताओं को मिलेगा।
विधेयक पारित होने के बाद होगी समीक्षा
सीतारमण ने यह भी बताया कि यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लागू करने का कोई अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि संसद में 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज विधेयक 2026' पारित होने के बाद ही एनपीसीआई की अगुवाई वाली यूपीआई एवं सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी इस विषय पर विचार करेगी। प्रस्तावित संशोधन केंद्र सरकार को यह अधिकार देगा कि वह तय करे कि कौन-से इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम पूरी तरह निःशुल्क बने रहेंगे।
विपक्ष के आरोपों का खंडन
यह स्पष्टीकरण कांग्रेस नेता जयराम रमेश के उस बयान के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि एमडीआर का बोझ अंततः आम लोगों पर पड़ेगा। वित्त मंत्री ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि संसद की कार्यवाही बाधित न होती, तो इस विषय पर सदन में विस्तार से चर्चा संभव थी और कई भ्रम पहले ही दूर हो जाते।
डिजिटल भुगतान को सशक्त बनाने की दिशा में कदम
सरकार का कहना है कि प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य नए शुल्क को लागू करना नहीं है, बल्कि भविष्य के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार करना है। वर्तमान में यूपीआई और रुपे कार्ड पर शून्य एमडीआर व्यवस्था लागू है। यदि भविष्य में किसी बदलाव की आवश्यकता महसूस होती है, तो सरकार कानूनी प्रक्रिया के तहत निर्णय ले सकेगी। सरकार का जोर डिजिटल भुगतान प्रणाली को सुरक्षित, टिकाऊ और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर है।