×

विश्व आर्थिक स्थिति पर पश्चिम एशिया तनाव का प्रभाव: जीडीपी वृद्धि दर 6.6% का अनुमान

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का भारत की जीडीपी वृद्धि दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। एसबीआई रिसर्च ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.6% रहने का अनुमान लगाया है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 3 जून से शुरू होने वाली है, जिसमें महंगाई और आर्थिक प्रभावों पर चर्चा की जाएगी। जानें इस बैठक में क्या निर्णय लिए जा सकते हैं और इसके संभावित परिणाम क्या हो सकते हैं।
 

पश्चिम एशिया तनाव का प्रभाव


GDP Growth Rate (बिजनेस डेस्क): वैश्विक परिस्थितियों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने की संभावना है। अमेरिका द्वारा किए गए हमले के बाद, ईरान ने मार्च के पहले सप्ताह में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधा आई। इस कारण, एसबीआई रिसर्च ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के आधार पर यह अनुमान बदल सकता है।


आरबीआई को उठाने होंगे कदम

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि आरबीआई को ब्याज दरों को स्थिर रखते हुए आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए। यदि मुद्रास्फीति में वृद्धि होती है, तो केंद्रीय बैंक के पास वैकल्पिक नीतिगत उपाय उपलब्ध हैं, जैसे कि ऑपरेशन ट्विस्ट, जो बिना बेंचमार्क ब्याज दरों में बदलाव किए बाजार की स्थितियों को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।


आरबीआई-एमपीसी की बैठक की तारीख

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (आरबीआई-एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक 3 जून से शुरू होगी। इस बैठक में, आरबीआई पश्चिम एशिया के तनाव के कारण महंगाई और आर्थिक प्रभावों पर चर्चा करेगा। उम्मीद है कि इस बैठक में आरबीआई रेपो रेट को वर्तमान स्तर पर बनाए रखेगा।


इसका मतलब है कि ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। जानकारों का मानना है कि जून की एमपीसी में केंद्रीय बैंक सतर्कता बनाए रखेगा और पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों, कमोडिटी की कीमतों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और वित्तीय बाजारों पर उनके प्रभावों पर ध्यान देगा, उसके बाद ही कोई नीतिगत कदम उठाएगा।