वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पश्चिम एशिया के तनाव का प्रभाव
पश्चिम एशिया में तनाव और ऊर्जा बाजार
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का प्रभाव अब वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में शुरुआती कारोबार के दौरान तेजी आई। हालांकि, बाद में कीमतों में कुछ कमी आई, लेकिन बाजार में चिंता का माहौल बना हुआ है। निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि इजराइल और ईरान के बीच बढ़ता संघर्ष वैश्विक तेल आपूर्ति को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
जानकारी के अनुसार, दिन की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतें पांच प्रतिशत से अधिक बढ़ गई थीं। बाद में कुछ मुनाफावसूली और सैन्य गतिविधियों से जुड़ी नई सूचनाओं के कारण बढ़त सीमित हो गई। फिर भी, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
ईरान की सैन्य कार्रवाई
ईरान की सेना ने सोमवार को बताया कि अप्रैल में हुए युद्धविराम के बाद इजराइल के खिलाफ उसकी पहली सैन्य कार्रवाई का चरण पूरा हो चुका है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इजराइल लेबनान में हमले जारी रखता है, तो उसकी प्रतिक्रिया और अधिक कठोर हो सकती है। इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीदें कमजोर पड़ी हैं।
इजराइल और ईरान के बीच बढ़ता टकराव
हाल के दिनों में इजराइल और ईरान के बीच सैन्य टकराव में वृद्धि हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, इजराइल ने दक्षिण-पश्चिमी ईरान में एक पेट्रोरसायन संयंत्र को निशाना बनाया, जिसे बैलिस्टिक मिसाइलों के निर्माण में उपयोग किया जाता था। इसके जवाब में, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने इजराइल के हाइफा शहर में एक समान प्रतिष्ठान पर हमला करने की बात कही है।
अमेरिका की अपील
इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति ने दोनों देशों से तुरंत गोलीबारी और हमले रोकने की अपील की है। हालांकि, जमीनी हालात फिलहाल स्थायी समाधान की ओर नहीं बढ़ते दिख रहे हैं।
तेल बाजार की चिंताएं
तेल बाजार की सबसे बड़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी हुई है, जो दुनिया की तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वैश्विक स्तर पर प्रतिदिन होने वाली तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध पूरी दुनिया की ऊर्जा व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
ईरान का बयान
मॉस्को में ईरान के राजदूत ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला रहेगा, लेकिन इसके संचालन से जुड़ी कुछ शर्तें ईरान और ओमान द्वारा तय की जाएंगी। इनमें पारगमन शुल्क जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल हो सकती हैं।
तेल उत्पादक देशों का निर्णय
तेल उत्पादक देशों के समूह और उनके सहयोगियों ने आपूर्ति संकट को देखते हुए उत्पादन लक्ष्य में चौथी बार बढ़ोतरी पर सहमति जताई है। हालांकि, कई विशेषज्ञों का मानना है कि इसका वास्तविक प्रभाव सीमित रहेगा, क्योंकि कई सदस्य देश मौजूदा परिस्थितियों में अपने निर्धारित उत्पादन लक्ष्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
वैश्विक बाजार पर दबाव
विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा, रूस की उत्पादन क्षमता पर हमले और क्षेत्रीय संघर्षों के कारण वैश्विक बाजार पहले से ही भारी दबाव में है। रिपोर्टों के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से दुनिया एक अरब बैरल से अधिक तेल आपूर्ति खो चुकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इस संकट का प्रभाव और गहरा हो सकता है।