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वैश्विक तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, भारत पर पड़ सकता है असर

वैश्विक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे भारत जैसे आयातक देशों पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इस संकट के चलते उत्पादन में कमी और महंगाई बढ़ने की संभावना है। जानें इस मुद्दे पर और क्या हो रहा है।
 

कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि

वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को प्रमुखता दी है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतों में दो प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी गई है.


ब्रेंट और अमेरिकी तेल की कीमतें

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट कच्चा तेल लगभग 102 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल भी 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब है। पिछले कारोबारी सत्र में कीमतों में गिरावट आई थी, लेकिन अब आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं ने बाजार को फिर से ऊपर की ओर धकेल दिया है.


होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति

सूत्रों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, वर्तमान में काफी हद तक बाधित है। यह मार्ग दुनिया के कुल तेल और तरलीकृत गैस व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है.


ईरान और अमेरिका के बीच तनाव

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान के चल रहे संघर्ष ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। यह संघर्ष अब तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जिससे आपूर्ति में बाधा और कीमतों में वृद्धि की आशंका बढ़ गई है.


अमेरिका की सुरक्षा अपील

अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों से जहाजों की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की थी, लेकिन कई देशों ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है, जिससे अमेरिका की नाराजगी भी सामने आई है.


संवेदनशील स्थिति

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और किसी भी छोटे हमले या दुर्घटना से हालात और बिगड़ सकते हैं.


ईरान का भारत से अनुरोध

इस बीच, ईरान ने भारत से फरवरी में जब्त किए गए तीन तेल टैंकरों को छोड़ने का अनुरोध किया है। यह बातचीत उन जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए हो रही है जो भारत से जुड़े हैं.


उत्पादन में कमी

इस संकट का असर उत्पादन पर भी पड़ने लगा है। संयुक्त अरब अमीरात, जो प्रमुख तेल उत्पादक देशों में से एक है, ने अपने उत्पादन में भारी कटौती की है, जिससे इसकी आपूर्ति आधे से भी कम हो गई है.


अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की सलाह

ऊर्जा लागत में वृद्धि को देखते हुए, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने अपने सदस्य देशों को भंडार से अतिरिक्त तेल जारी करने पर विचार करने का सुझाव दिया है.


भविष्य की संभावनाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा चलता है, तो आने वाले समय में तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। कुछ बड़े बैंकों ने भी अपने पूर्वानुमान बढ़ा दिए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में अनिश्चितता बनी रह सकती है.


भारत पर प्रभाव

इस घटनाक्रम का सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं। ऐसे में महंगाई और ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.