वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट, अमेरिका-ईरान वार्ता की उम्मीदें
तेल की कीमतों में भारी गिरावट
नई दिल्ली, 3 अगस्त - अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता के चलते पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत मिले हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। इस स्थिति के चलते घरेलू वायदा बाजार में कच्चे तेल का भाव सोमवार को 6 प्रतिशत से अधिक गिरकर 7,601 रुपये प्रति बैरल पर पहुंच गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अगस्त में आपूर्ति वाले कच्चे तेल के वायदा अनुबंध का मूल्य 512 रुपये यानी 6.31 प्रतिशत घटकर 7,601 रुपये प्रति बैरल रह गया।
इस दौरान, यह अनुबंध अपने निचले सर्किट स्तर तक भी पहुंच गया। इसी प्रकार, सितंबर में आपूर्ति वाले अनुबंध का मूल्य भी निवेशकों की भारी बिकवाली के कारण 415 रुपये यानी 5.3 प्रतिशत घटकर 7,424 रुपये प्रति बैरल पर आ गया। कारोबारियों का कहना है कि घरेलू बाजार में यह गिरावट विदेशी बाजारों की कमजोरी के अनुरूप रही।
बाजार के प्रतिभागियों ने जोखिम वाले सौदों में कमी की है, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों से होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से तेल आपूर्ति में लंबे समय तक रुकावट नहीं आएगी। घरेलू बाजार में बिकवाली अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के अनुरूप रही। इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) पर अक्टूबर में आपूर्ति वाले ब्रेंट कच्चे तेल के अनुबंध का वायदा मूल्य 6.38 डॉलर यानी 7.3 प्रतिशत घटकर 81.55 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
वहीं, अमेरिकी मानक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) का मूल्य भी 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आ गया। न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (एनवाईएमईएक्स) पर इसकी कीमत 5.89 डॉलर यानी लगभग 7 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78.78 डॉलर प्रति बैरल रही। विश्लेषकों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव में कमी के संकेत मिलने के बाद निवेशकों ने तेजी से मुनाफा वसूली की।
इससे वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं कम हुईं, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्र में घटनाक्रम पर सतर्क नजर बनाए रखने की आवश्यकता है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ वार्ता सोमवार को होगी, लेकिन उन्होंने किसी समझौते की समयसीमा का उल्लेख नहीं किया।
ट्रंप ने इससे पहले कहा था कि उन्होंने तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर मतभेद सुलझाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की उम्मीद में प्रस्तावित सैन्य हमले को टाल दिया है।