वैश्विक तेल बाजार में आपात भंडार से तेल जारी करने का निर्णय
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी से जुड़े देशों ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति की चिंताओं के बीच अपने आपात भंडार से तेल जारी करने का निर्णय लिया है। सदस्य देशों ने 41 करोड़ बैरल से अधिक तेल बाजार में उपलब्ध कराने का वादा किया है। इस कदम का उद्देश्य ऊर्जा आपूर्ति को संतुलित करना और कीमतों में वृद्धि को नियंत्रित करना है। जानें इस निर्णय के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
Mar 15, 2026, 23:19 IST
आपात भंडार से तेल जारी करने का निर्णय
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति की चिंताओं के बीच, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी से जुड़े देशों ने अपने आपात भंडार से बड़ी मात्रा में तेल जारी करने का निर्णय लिया है। हालिया जानकारी के अनुसार, सदस्य देशों ने मिलकर लगभग 41 करोड़ बैरल से अधिक तेल बाजार में उपलब्ध कराने का वादा किया है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। इसी संदर्भ में, ऊर्जा आपूर्ति को संतुलित रखने और कीमतों में वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने एक बयान में कहा है कि कुल घोषित मात्रा में से लगभग 27 करोड़ बैरल तेल सीधे सरकारी भंडार से जारी किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, लगभग 11 करोड़ 60 लाख बैरल तेल उद्योग से जुड़े अनिवार्य भंडार से उपलब्ध कराया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, लगभग 2 करोड़ 36 लाख बैरल तेल अन्य स्रोतों से बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। एजेंसी का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना और संभावित संकट से निपटना है।
जारी किए जाने वाले कुल तेल में लगभग 72 प्रतिशत कच्चे तेल का होगा, जबकि 28 प्रतिशत तैयार पेट्रोलियम उत्पादों का होगा। इससे उम्मीद की जा रही है कि बाजार में तुरंत आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा।
एजेंसी के अनुसार, एशिया और ओशिनिया क्षेत्र के देशों के भंडार से तेल तुरंत बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं, यूरोप और अमेरिका क्षेत्र के भंडार से तेल मार्च के अंत तक बाजार में आने की संभावना है।
हालिया जानकारी के अनुसार, ऊर्जा बाजार में पिछले कुछ समय से अनिश्चितता बनी हुई है और कई देशों को तेल आपूर्ति को लेकर चिंता है। ऐसे में आपात भंडार का उपयोग कर वैश्विक बाजार में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाजार में आपूर्ति बढ़ती है, तो तेल की कीमतों में तेजी को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है, हालांकि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव की स्थिति आगे किस दिशा में जाती है।