वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी
वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है, जो 11 जून के बाद का सबसे निचला स्तर है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और संभावित ब्याज दरों में वृद्धि के कारण निवेशक सतर्क हैं। जानें अन्य कीमती धातुओं की स्थिति और अमेरिका-ईरान वार्ता के प्रभाव के बारे में।
Jun 24, 2026, 21:35 IST
सोने की कीमतों में गिरावट
वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। बुधवार को अंतरराष्ट्रीय हाजिर बाजार में सोने की कीमत लगभग 0.5 प्रतिशत घटकर 4,087.68 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई, जो 11 जून के बाद का सबसे निचला स्तर है। इसी तरह, अगस्त डिलीवरी वाले अमेरिकी सोना वायदा अनुबंध में भी 1.1 प्रतिशत की कमी आई, जिससे इसका मूल्य 4,105.40 डॉलर प्रति औंस हो गया है।
अन्य कीमती धातुओं पर भी दबाव
सोने के साथ-साथ अन्य कीमती धातुओं की कीमतों में भी गिरावट देखी गई है। चांदी की कीमत 1.1 प्रतिशत घटकर 61.36 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। वहीं, प्लैटिनम में 0.9 प्रतिशत और पैलेडियम में 1.2 प्रतिशत की कमी आई है। यह संकेत देता है कि निवेशक सुरक्षित निवेश के पारंपरिक विकल्पों के प्रति सतर्कता बरत रहे हैं।
डॉलर की मजबूती का प्रभाव
सोने की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती मानी जा रही है। डॉलर सूचकांक एक वर्ष से अधिक के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे मांग में कमी आती है और कीमतों पर दबाव बढ़ता है।
ब्याज दरों में संभावित वृद्धि
अमेरिकी केंद्रीय बैंक की संभावित मौद्रिक नीति पर भी बाजार में चर्चा चल रही है। आंकड़ों के अनुसार, कारोबारी इस वर्ष अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा तीन बार ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना का आकलन कर रहे हैं। यदि ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशकों का झुकाव ब्याज देने वाली परिसंपत्तियों की ओर बढ़ सकता है, जिससे सोने की मांग प्रभावित हो सकती है।
अमेरिका-ईरान वार्ता के संकेत
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं से विरोधाभासी संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि ईरान ने अनिश्चितकाल तक परमाणु निरीक्षण की अनुमति देने पर सहमति जताई है, जबकि ईरान ने इस दावे को खारिज किया है। यह स्थिति दोनों देशों के बीच नाजुक शांति समझौते को लेकर नए सवाल खड़े कर रही है।
भू-राजनीतिक तनाव और सोने की मांग
विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव आमतौर पर सोने की मांग को बढ़ाता है, लेकिन वर्तमान में निवेशकों का ध्यान अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और ब्याज दरों पर केंद्रित है। अब बाजार की नजर अमेरिकी व्यक्तिगत उपभोग व्यय आंकड़ों पर है, जिन्हें मुद्रास्फीति मापने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
दुबई और घाना के नए कदम
दुबई का प्रमुख जिंस बाजार नए सोना अनुबंध की शुरुआत करने जा रहा है, जिसका उद्देश्य तेज कारोबार और बेहतर तरलता के माध्यम से निवेशकों को आकर्षित करना है। इसके अलावा, घाना के स्वर्ण बोर्ड ने भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नई मूल्य निर्धारण व्यवस्था लागू करने की घोषणा की है।
भविष्य की संभावनाएं
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में डॉलर की चाल, ब्याज दरों से जुड़े संकेत और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम सोने की कीमतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। फिलहाल निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना हुआ है।