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शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना, ट्रंप के शुल्कों का असर

अगले सप्ताह शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना है, जो घरेलू वृहद आर्थिक आंकड़ों और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के शुल्कों में वृद्धि से प्रभावित हो सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, अमेरिका-ईरान तनाव, और कच्चे तेल की कीमतें भी बाजार की दिशा तय करेंगी। जानें इस विषय पर और क्या कहा जा रहा है और बाजार की संभावित स्थिति के बारे में अधिक जानकारी।
 

आगामी सप्ताह में बाजार की स्थिति

घरेलू वृहद आर्थिक आंकड़ों, मासिक वायदा और विकल्प (एफएंडओ) निपटान, और अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के हालिया निर्णय के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुल्कों में वृद्धि के चलते अगले सप्ताह शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव की संभावना जताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, और वैश्विक मौद्रिक संकेत भी बाजार की दिशा को प्रभावित करेंगे।


विश्लेषकों की राय

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा कि अगले सप्ताह बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है, खासकर 24 फरवरी को होने वाले मासिक एफएंडओ निपटान के कारण। घरेलू मोर्चे पर, निवेशकों की नजर जीडीपी के आंकड़ों, विदेशी मुद्रा भंडार, और बुनियादी ढांचे के उत्पादन पर रहेगी। उन्होंने यह भी बताया कि निवेशक ट्रंप के नए कार्यकारी आदेश के प्रभावों का आकलन करेंगे, जो व्यापार की स्थिति और शुल्क संरचना को प्रभावित कर सकते हैं।


ट्रंप के शुल्कों का प्रभाव

विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप ने शुक्रवार को अदालत के फैसले के बाद भारत समेत कई देशों पर 150 दिन के लिए 10 प्रतिशत शुल्क लगाया, जिसे एक दिन बाद बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया। इससे व्यापारिक तनाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित नकारात्मक प्रभाव की चिंताएं बढ़ गई हैं। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि निवेशक अमेरिका-ईरान संबंधों, कच्चे तेल की कीमतों, और वैश्विक मौद्रिक संकेतों पर ध्यान देंगे।


पिछले सप्ताह का बाजार प्रदर्शन

पिछले सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 187.95 अंक या 0.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि एनएसई के निफ्टी में 100.15 अंक या 0.39 प्रतिशत की तेजी रही। नायर ने बताया कि पिछले सप्ताह बाजार की धारणा सतर्कता और उत्साह के बीच झूलती रही। बैंकिंग, वित्तीय, बिजली, और कुछ एफएमसीजी शेयरों में खरीदारी ने वैश्विक अनिश्चितताओं के प्रभाव को कम करने में मदद की। हालांकि, आईटी शेयरों में एआई से जुड़े बदलावों और मार्जिन दबाव के कारण सुस्ती रही।


भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में घरेलू बाजार सीमित दायरे में रह सकता है, जहां नकदी का प्रवाह और वैश्विक जोखिम धारणा मुख्य कारक साबित होंगे।