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शेयर बाजार में गिरावट: सेंसेक्स और निफ्टी में भारी नुकसान

मंगलवार को शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 1,400 अंक गिरकर 74,003.82 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 23,118.60 पर रहा। बाजार में गिरावट का प्रभाव व्यापक था, जिसमें बड़ी कंपनियों के मुकाबले मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों में अधिक बिकवाली हुई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक बाजार की स्थिति ने भी बाजार पर दबाव डाला। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और आगे की संभावनाएं।
 

बाजार में गिरावट का व्यापक असर

मंगलवार को शेयर बाजार में कारोबार के दौरान तेज गिरावट देखी गई। सुबह की सकारात्मकता पूरी तरह समाप्त हो गई, और सेंसेक्स लगभग 1,400 अंक गिरकर गहरे लाल निशान में बंद हुआ। सेंसेक्स 777.94 अंक या 1.04 प्रतिशत की कमी के साथ 74,003.82 पर समाप्त हुआ। वहीं, निफ्टी 279.50 अंक या 1.19 प्रतिशत गिरकर 23,118.60 पर बंद हुआ।


शेयरों में गिरावट का विवरण

इस दिन बाजार में गिरावट का प्रभाव काफी व्यापक था। लगभग 1,070 शेयरों में वृद्धि हुई, जबकि 3,054 शेयरों में गिरावट आई और 134 शेयर बिना किसी बदलाव के बंद हुए। बड़ी कंपनियों की तुलना में मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों में अधिक बिकवाली हुई। दोनों सूचकांकों में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी कारोबार के अंत में 23,100 के महत्वपूर्ण स्तर के आसपास पहुंच गया।


क्षेत्रवार प्रदर्शन

क्षेत्रवार विश्लेषण करने पर, सूचना प्रौद्योगिकी और दवा कंपनियों के शेयरों ने बाजार को कुछ सहारा दिया। इसके विपरीत, बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के शेयरों पर दबाव बना रहा। निफ्टी की 50 कंपनियों में से केवल 10 शेयरों ने बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। एचसीएल टेक्नोलॉजीज और इंफोसिस में लगभग चार प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और टेक महिंद्रा में दो प्रतिशत से अधिक की तेजी देखी गई।


एचडीएफसी बैंक और अन्य कंपनियों का प्रदर्शन

एचडीएफसी बैंक ने एक प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की। बैंक ने प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद के लिए दो नाम भारतीय रिजर्व बैंक को भेजे हैं। इसके विपरीत, आईसीआईसीआई बैंक और लार्सन एंड टुब्रो जैसे बड़े शेयरों ने निफ्टी पर अधिक दबाव डाला।


सोलर इंडस्ट्रीज की हलचल

सोलर इंडस्ट्रीज के शेयरों में सबसे अधिक गतिविधि देखी गई। कंपनी ने बताया कि उसकी सहायक कंपनी दक्षिण अफ्रीका की ओम्निया होल्डिंग्स को लगभग 1.36 अरब डॉलर में पूरी नकद राशि देकर खरीदेगी। इस खबर के बाद निवेशकों की प्रतिक्रिया कमजोर रही और शेयर दिन के दौरान 14.5 प्रतिशत तक गिरकर 19,065 रुपये पर पहुंच गया। अंत में इसमें लगभग 14 प्रतिशत की गिरावट रही।


टाटा समूह की कंपनियों में खरीदारी

दूसरी ओर, टाटा समूह की कंपनियों में जोरदार खरीदारी हुई। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा टाटा संस की निवेश कंपनी के रूप में बने रहने से जुड़ी अर्जी खारिज किए जाने की खबर के बाद, टाटा केमिकल्स 20 प्रतिशत बढ़कर 734.90 रुपये पर ऊपरी सीमा में बंद हुआ। टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन में भी 10 प्रतिशत से अधिक की तेजी रही।


कच्चे तेल की कीमतों का प्रभाव

बाजार में दबाव की मुख्य वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष के बढ़ने की आशंका के बीच, ब्रेंट कच्चा तेल एशियाई कारोबार में 108 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया। भारत, जो दुनिया के बड़े तेल आयातकों में से एक है, महंगे तेल के कारण महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है।


वैश्विक बाजार की स्थिति

वैश्विक बाजार से भी निवेशकों को राहत नहीं मिली। अमेरिका में 10 साल की सरकारी ऋण प्रतिभूतियों पर ब्याज दर अक्टूबर 2023 के बाद पहली बार पांच प्रतिशत के करीब पहुंच गई। यह संकेत दुनिया की वित्तीय व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।


तकनीकी विश्लेषण

तकनीकी दृष्टिकोण से, निफ्टी कमजोर नजर आ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी लौटने के लिए 23,500 से 23,600 के ऊपर टिकना आवश्यक है। बजाज ब्रोकिंग के उपाध्यक्ष शोध पाबित्रो मुखर्जी ने कहा कि 23,500 के ऊपर मजबूती आने पर 23,650 तक वापसी हो सकती है।


भारत अस्थिरता सूचकांक

इस बीच, भारत अस्थिरता सूचकांक लगभग 9 प्रतिशत बढ़कर 13.43 पर पहुंच गया। इसका बढ़ना बताता है कि बाजार में अगले कुछ दिनों के लिए बेचैनी बढ़ी हुई है और निवेशकों के लिए सावधानी के संकेत हैं।