संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट: जीडीपी से परे प्रगति के संकेतक
संयुक्त राष्ट्र की 'बियॉन्ड GDP' रिपोर्ट
आर्थिक विकास दर (GDP) के आंकड़ों पर चल रही बहस के बीच, संयुक्त राष्ट्र के एक विशेषज्ञ समूह ने 'बियॉन्ड GDP' शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि जीडीपी को प्रगति का मुख्य मानक मानने की परंपरा दशकों से चली आ रही है, जबकि असमानता, पर्यावरणीय समस्याएं और सार्वजनिक संस्थानों में घटता विश्वास भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। समूह ने प्रगति को मापने के लिए 31 संकेतकों का एक व्यावहारिक डैशबोर्ड विकसित करने का सुझाव दिया है।
चार स्तंभों पर आधारित नया ढांचा
प्रस्तावित ढांचे को चार मुख्य स्तंभों पर आधारित किया गया है: पहला- शांति, मानवाधिकार और पर्यावरण का सम्मान; दूसरा- लोगों का वर्तमान कल्याण (स्वास्थ्य, शिक्षा, कार्य-स्थिति और सुरक्षा); तीसरा- समानता और समावेशिता; और चौथा- स्थिरता और लचीलापन। इस विशेषज्ञ समूह की सह-अध्यक्षता कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कौशिक बासु और नोरा लस्टिग ने की थी, और इसे मई 2025 में गठित किया गया था। वर्तमान में इस रिपोर्ट पर अंतर-सरकारी स्तर पर चर्चा चल रही है।
भारत का दृष्टिकोण और आधार वर्ष में संशोधन
भारतीय आधिकारिक सूत्रों ने इस रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए कहा है कि इस पर तुरंत कार्य करना जल्दबाजी होगी। हालांकि, भारत का ध्यान भविष्य में हर पांच साल में जीडीपी के आधार वर्ष को संशोधित करने पर है, जो कोविड-19 महामारी के कारण टल गया था। इसके साथ ही, आर्थिक गतिविधियों और मांग में बदलावों का सटीक आकलन करने के लिए औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की तरह चेन-बेस्ड इंडेक्स मैकेनिज्म अपनाने की योजना है।
जीडीपी आंकड़ों पर सरकार का पक्ष
31 अगस्त को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष में पश्चिम एशिया संघर्ष के बावजूद भारत की आर्थिक विकास दर 7.8% दर्ज की गई थी। आंकड़ों की सटीकता और नए आधार वर्ष को लेकर उठे सवालों पर सरकार ने 2 सितंबर को डेटा का बचाव करते हुए स्पष्ट किया था कि सभी स्रोत सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं।