सऊदी अरब ने कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक कमी की
तेल संकट के बाद सऊदी अरब का बड़ा कदम
दुनिया भर में लंबे समय तक तेल की कमी बनी रही, खासकर होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के कारण। इस स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं। हाल ही में, सऊदी अरब ने सभी को चौंकाते हुए कच्चे तेल की कीमतों में 11 डॉलर प्रति बैरल की कमी की है, जो पिछले 25 वर्षों में पहली बार हुआ है। इस कटौती के बाद, कच्चे तेल की कीमतें फरवरी के स्तर पर लौट आई हैं, और इसके पीछे बढ़ती प्रतिस्पर्धा को मुख्य कारण माना जा रहा है.
सऊदी अरब का निर्णय और इसके कारण
सऊदी अरब ने यह मूल्य कटौती अपने एशियाई ग्राहकों के लिए की है, क्योंकि इन देशों के पास कई विकल्प मौजूद हैं। एक सर्वेक्षण में 8 डॉलर की कटौती का अनुमान लगाया गया था, लेकिन सऊदी अरब ने 11 डॉलर की कमी की घोषणा की है। यह ओमान/दुबई के बेंचमार्क से भी 1.5 डॉलर कम है, जिससे यह चर्चा का विषय बन गया है.
क्यों जरूरी था यह कदम?
लंबे समय तक सप्लाई में रुकावट के कारण कीमतें बढ़ गई थीं, और स्टॉक भी काफी बढ़ गया था। अमेरिका और ईरान के बीच समझौते और होर्मुज स्ट्रेट के खुलने से तेल की कीमतें गिरने लगी हैं। अब सभी तेल उत्पादक देशों के बीच कच्चे तेल की बिक्री के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। पश्चिमी एशिया के देशों को होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से सबसे अधिक नुकसान हुआ है, जबकि रूस और अमेरिका को इसका लाभ मिला है.
सऊदी अरब की स्थिति
सऊदी अरब, जो एक तेल आधारित अर्थव्यवस्था है, ने फरवरी में लगभग 1 करोड़ बैरल प्रति दिन का उत्पादन किया था। मार्च में युद्ध के कारण यह उत्पादन 50 लाख बैरल प्रति दिन से भी कम हो गया। इस स्थिति में सऊदी अरब को भारी नुकसान उठाना पड़ा, जिसकी रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के कारण उसे लगभग 42 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। अब, होर्मुज स्ट्रेट के खुलने के बाद, सऊदी अरब ने अपनी सप्लाई बढ़ाई है और कीमतों में कमी कर प्रतिस्पर्धा में मजबूती लाने का प्रयास कर रहा है.
भारत को मिलेगा लाभ
भारत, जो एशिया में एक प्रमुख रिफाइनर है, अब सस्ती कच्चे तेल की कीमतों का लाभ उठा सकता है। भारत में कई बड़ी तेल कंपनियां रिफाइनरी चलाती हैं और कच्चे तेल को विभिन्न उत्पादों में परिवर्तित करती हैं। यदि ये कंपनियां सऊदी अरब से सस्ता कच्चा तेल खरीदती हैं, तो उन्हें इसका बड़ा लाभ मिल सकता है.