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सरकार का नया कदम: छोटे उद्योगों के लिए आपातकालीन क्रेडिट योजना का विस्तार

केंद्र सरकार ने छोटे और मध्यम उद्योगों को राहत देने के लिए आपातकालीन क्रेडिट गारंटी योजना के पांचवे चरण को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य व्यापार में नकदी की कमी को दूर करना है, खासकर जब पश्चिम एशिया में अस्थिरता का असर व्यापार पर पड़ रहा है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को 100 प्रतिशत तक की गारंटी मिलेगी, जबकि अन्य बड़े उद्योगों को 90 प्रतिशत तक की गारंटी दी जाएगी। कंपनियां अपने पिछले वित्त वर्ष की कार्यशील पूंजी के आधार पर अतिरिक्त लोन ले सकेंगी।
 

सरकार का नया कदम

केंद्र सरकार ने छोटे और मध्यम उद्योगों को समर्थन देने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। हाल ही में, आपातकालीन क्रेडिट गारंटी योजना के पांचवे चरण को मंजूरी दी गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य व्यापार में नकदी की कमी को दूर करना है.


व्यापार पर असर

यह योजना ऐसे समय में लागू की गई है जब पश्चिम एशिया में चल रही अस्थिरता के कारण व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है। सरकार का मानना है कि इस पहल से कंपनियों को वित्तीय दबाव से उबरने में सहायता मिलेगी.


क्रेडिट गारंटी का विवरण

इस योजना के अंतर्गत बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा दिए गए अतिरिक्त क्रेडिट पर राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी न्यासी कंपनी लिमिटेड द्वारा गारंटी प्रदान की जाएगी। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को इस योजना के तहत 100 प्रतिशत तक की गारंटी मिलेगी, जबकि बड़े उद्योगों और विमानन क्षेत्र को 90 प्रतिशत तक की गारंटी दी जाएगी.


लाभार्थियों की पात्रता

इस योजना का लाभ उन कंपनियों को मिलेगा जिनके लोन खाते 31 मार्च 2026 तक मानक श्रेणी में हैं और जिनके पास पहले से कार्यशील पूंजी की व्यवस्था है। इसमें नियमित यात्री सेवाएं देने वाली विमानन कंपनियां भी शामिल हैं.


लोन की सीमा और अवधि

कंपनियां अपने पिछले वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में उपयोग की गई कार्यशील पूंजी के आधार पर अतिरिक्त 20 प्रतिशत तक लोन ले सकेंगी। सामान्य कारोबार के लिए यह सीमा 100 करोड़ रुपये तक है, जबकि विमानन कंपनियों के लिए यह सीमा 1500 करोड़ रुपये तक बढ़ाई गई है. लोन चुकाने की अवधि भी कंपनियों की जरूरतों के अनुसार निर्धारित की गई है, जिसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को पांच वर्ष और विमानन क्षेत्र को सात वर्ष की अवधि दी गई है.