सरकार का नया प्रस्ताव: बीएस-6 वाहनों के लिए पीयूसीसी की वैधता बढ़ाने की योजना
सरकार का नया कदम
नई दिल्ली, 27 जुलाई: सरकार ने वाहन मालिकों के लिए अनुपालन की कठिनाइयों को कम करने के उद्देश्य से छह साल पुराने निजी भारत चरण-6 (बीएस-6) वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) की वैधता को एक वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष करने का प्रस्ताव रखा है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस संबंध में एक मसौदा अधिसूचना जारी की है।
इस प्रस्ताव के तहत, छह से दस वर्ष पुराने बीएस-6 वाहनों को हर दो वर्ष में अपने पीयूसीसी प्रमाणपत्र का नवीनीकरण कराना होगा, जबकि 10 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों के लिए यह प्रक्रिया हर छह महीने में करनी होगी।
इसके अतिरिक्त, बीएस-4 उत्सर्जन मानकों का पालन करने वाले सभी मोटर वाहनों को हर छह महीने में अपने पीयूसीसी का नवीनीकरण कराना अनिवार्य होगा।
बीएस-1, बीएस-2 और बीएस-3 मानकों का पालन करने वाले वाहनों के लिए यह नवीनीकरण हर तीन महीने में करना होगा। बीएस का अर्थ भारत चरण है, जो देश में वाहन उत्सर्जन मानकों से संबंधित है। यह मानक कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषकों की अधिकतम सीमा निर्धारित करता है।
बीएस-4 मानक 2017 से 2020 तक लागू रहा, जबकि बीएस-6 अप्रैल 2020 से प्रभावी है। प्रदूषण नियंत्रण में सुधार के लिए भारत ने बीएस-5 मानक को छोड़कर सीधे बीएस-6 पर स्विच किया।
बीएस-6 वाहनों का प्रदूषण स्तर बहुत कम होता है और इन्हें कम सल्फर वाले बीएस-6 ईंधन की आवश्यकता होती है।