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सरकार का वित्तीय स्वास्थ्य: जीडीपी के मुकाबले ऋण अनुपात का नया पैमाना

सरकार ने वित्तीय स्वास्थ्य को मापने के लिए जीडीपी के मुकाबले ऋण अनुपात को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। इससे राजस्व और खर्च के बीच अनुशासन की चर्चा कम महत्वपूर्ण हो जाएगी। इस नए पैमाने के तहत, सरकार अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार का दावा कर सकेगी। जानें कि यह बदलाव कैसे केंद्र के वित्तीय अनुशासन को प्रभावित करेगा और इसके पीछे के आंकड़े क्या हैं।
 

वित्तीय स्वास्थ्य का नया मापदंड

सरकार अगले वित्त वर्ष से जीडीपी के सापेक्ष ऋण के अनुपात को वित्तीय स्वास्थ्य का मापदंड बनाने जा रही है। इससे सरकार की आमदनी और खर्च के बीच अनुशासन की चर्चा कम महत्वपूर्ण हो जाएगी।


वित्तीय वर्ष 2026-27 से सरकार की वित्तीय स्थिति को मापने का तरीका बदल जाएगा। वर्तमान में यह राजकोषीय घाटे पर आधारित है, लेकिन अब केंद्र जीडीपी के मुकाबले कर्ज के अनुपात को प्राथमिकता देगा। इस वित्त वर्ष में जीडीपी के सापेक्ष कर्ज का अनुपात 55 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पहले यह 56 प्रतिशत होने की संभावना थी। इस बदलाव से सरकार अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार का दावा कर सकेगी। इस नए पैमाने में राजस्व पर ध्यान केंद्रित नहीं किया जाएगा, जैसा पहले होता था।


जीडीपी पूरे आर्थिक प्रदर्शन का माप है, जिसमें निजी क्षेत्र और उपभोक्ताओं का योगदान शामिल है। सरकारी कर्ज के अनुपात को मापने से यह सुनिश्चित होगा कि सरकार की आमदनी और खर्च के बीच अनुशासन की चर्चा कम महत्वपूर्ण हो जाएगी, जबकि यह एक महत्वपूर्ण पहलू है। केंद्र के खजाने पर ऋण चुकाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। अनुमान के अनुसार, 2025-26 में केंद्र ने 14.82 लाख करोड़ रुपये का सकल और 11.63 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध ऋण लिया है। इसमें से लगभग 3.20 लाख करोड़ रुपये का पुराना ऋण चुकाया गया है। पुराने ऋण की बढ़ती देनदारी के कारण, 2026-27 में केंद्र को 16 से 17 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेना पड़ सकता है।


इसका मतलब है कि सरकार का राजस्व कर्ज की देनदारी के अनुपात में नहीं बढ़ रहा है। इन तथ्यों के मद्देनजर, यह बेहतर होगा कि केंद्र राजस्व की तुलना में ऋण के आंकड़ों को प्राथमिकता दे। यह तार्किक होगा कि इस गणना में केवल टैक्स राजस्व को शामिल किया जाए, क्योंकि यही अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है। हालांकि, नरेंद्र मोदी सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक से लाभांश की बड़ी राशि लेने की प्रक्रिया शुरू की है। इसके अलावा, विनिवेश जैसे अन्य स्रोतों से प्राप्तियों को भी राजस्व में शामिल किया जाता है। कुल मिलाकर, सभी राजस्व की तुलना में कर्ज की स्थिति महत्वपूर्ण है, जो सरकार के वित्तीय अनुशासन और राजकोषीय स्वास्थ्य को दर्शाती है। इस पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है।