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सरकार की हिस्सेदारी बिक्री योजना: एलआईसी और अन्य कंपनियों पर ध्यान

केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री की योजना को तेज करने का निर्णय लिया है। इसमें प्रमुख रूप से भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और हिंदुस्तान जिंक शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य राजकोषीय स्थिति को मजबूत करना और बजट पर दबाव को कम करना है। इस प्रक्रिया के तहत, निवेश बैंकों के साथ साप्ताहिक बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इसके अलावा, आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बिक्री को फिर से सक्रिय करने पर भी विचार किया जा रहा है। जानें इस योजना के पीछे की रणनीतियों और संभावित लाभों के बारे में।
 

सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री की योजना


केंद्र सरकार अब सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को तेज कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य राजकोषीय स्थिति को मजबूत करना और बजट पर बढ़ते दबाव को कम करना है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने एलआईसी, हिंदुस्तान जिंक और अन्य सरकारी बैंकों सहित आठ कंपनियों की पहचान की है, जिनमें जल्द ही हिस्सेदारी बिक्री की जा सकती है। इसके लिए निवेश बैंकों के साथ लगातार बैठकें आयोजित की जा रही हैं ताकि बाजार की मांग, मूल्य और समय-सीमा को निर्धारित किया जा सके।


एलआईसी से अधिकतम राजस्व की उम्मीद

सरकार की योजना में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का नाम सबसे प्रमुख है। रिपोर्टों के अनुसार, एलआईसी में हिस्सेदारी बिक्री से लगभग 10,000 करोड़ रुपये जुटाने की संभावना है। वहीं, हिंदुस्तान जिंक में हिस्सेदारी बेचने से लगभग 5,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद जताई गई है। अधिकारियों का मानना है कि इन सौदों से सरकार को अतिरिक्त संसाधन मिलेंगे, जिससे विकास योजनाओं और अन्य खर्चों के लिए वित्तीय गुंजाइश बढ़ेगी। यही कारण है कि हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।


साप्ताहिक रणनीतिक बैठकें

सूत्रों के अनुसार, हिस्सेदारी बिक्री कार्यक्रम की निगरानी कर रहे अधिकारी हर सप्ताह निवेश बैंकों के साथ बैठक कर रहे हैं। इन बैठकों में निवेशकों की रुचि, शेयरों की संभावित कीमत और बाजार में पेशकश के सही समय पर विस्तार से चर्चा की जा रही है। इसके साथ ही, सरकार भविष्य में और सरकारी कंपनियों को इस प्रक्रिया के लिए तैयार करने हेतु अतिरिक्त निवेश बैंकर भी नियुक्त कर रही है। यह संकेत देता है कि विनिवेश कार्यक्रम को एक दीर्घकालिक रणनीति के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।


आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बिक्री पर जोर

सरकार आईडीबीआई बैंक में अपनी बहुमत हिस्सेदारी बेचने की योजना को फिर से सक्रिय करने पर विचार कर रही है। पहले खरीदारों की कमजोर रुचि के कारण यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी। अब आरक्षित मूल्य में कमी और सीमित दायरे में नए प्रस्ताव मंगाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, नई बोली केवल उन्हीं पक्षों से ली जा सकती है जिन्होंने पहले चरण में भाग लिया था। इस कदम का उद्देश्य लंबे समय से अटके सौदे को आगे बढ़ाना और बेहतर प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है।


बाजार की चुनौतियों के बीच सरकार का आत्मविश्वास

सरकार ऐसे समय में हिस्सेदारी बिक्री बढ़ाने की तैयारी कर रही है जब विदेशी निवेशकों ने इस वर्ष की पहली छमाही में भारतीय शेयर बाजार से बड़ी निकासी की है और प्रमुख शेयर सूचकांक पर भी दबाव देखा गया है। इसके बावजूद, हाल के महीनों में कोल इंडिया और एनएचपीसी की हिस्सेदारी बिक्री को निवेशकों से अच्छा समर्थन मिला है, जिससे सरकार का आत्मविश्वास बढ़ा है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने 80,000 करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य रखा है। जून तक के तीन महीनों में लगभग दो अरब डॉलर जुटाकर सरकार ने पिछले तीन वर्षों की तुलना में बेहतर शुरुआत की है।