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सरकार के आयात शुल्क में वृद्धि से सोने और चांदी की कीमतों में उछाल

बुधवार को घरेलू सर्राफा बाजार में सरकार द्वारा आयात शुल्क बढ़ाने के निर्णय के बाद सोने और चांदी की कीमतों में भारी उछाल आया। सोने की कीमत में 9,700 रुपये से अधिक की वृद्धि हुई, जबकि चांदी का भाव 7 प्रतिशत तक चढ़ गया। इस कदम के पीछे के कारण और बाजार विशेषज्ञों की राय जानें।
 

घरेलू सर्राफा बाजार में हलचल

बुधवार को घरेलू सर्राफा बाजार में काफी गतिविधि देखने को मिली। सरकार ने बहुमूल्य धातुओं पर आयात शुल्क को 15 प्रतिशत तक बढ़ाने का निर्णय लिया, जिसके तुरंत बाद वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में भारी वृद्धि हुई। एक ही दिन में सोने की कीमतों में 9,700 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हुई, जबकि चांदी का भाव 7 प्रतिशत तक चढ़ गया।


मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर जून में डिलीवरी वाले सोने के अनुबंध का वायदा भाव 9,723 रुपये या 6.34 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1,63,165 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।


चांदी की कीमतों में वृद्धि

चांदी की कीमतों में भी उल्लेखनीय उछाल देखा गया। इसके जुलाई अनुबंध का भाव 19,439 रुपये या 6.97 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2,98,501 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। व्यापारियों का कहना है कि आयात शुल्क में वृद्धि के कारण घरेलू सर्राफा कीमतों में तेजी आई है।


सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क को छह प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। प्लैटिनम पर कर को 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे सोने/चांदी के डोरे, सिक्के और अन्य वस्तुओं पर भी कर में बदलाव किया गया है।


वित्त मंत्रालय की अधिसूचना

वित्त मंत्रालय की एक अधिसूचना के अनुसार, 13 मई से सामाजिक कल्याण अधिभार (एसडब्ल्यूएस) और कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (एआईडीसी) में वृद्धि की गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के संदर्भ में विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, सोने की खरीद और विदेश यात्रा को स्थगित करने जैसे उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया।


विशेषज्ञों की राय

बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि आयात शुल्क में इस वृद्धि से घरेलू स्तर पर सोने की लागत में वृद्धि हुई है। आगामी दिनों में शादियों के सीजन के कारण मांग पर इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है। इस कदम को तात्कालिक आर्थिक दबाव और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच रुपये को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।